आचरण-हरण
नेता जी को नमस्कार ना करो तो समझो नास हो गया
कोइ चमचा चरण पकड़ ले तो समझो वो खास हो गया
सुबह - सुबह लगती है लाइन चरण पकडने वालों की
चरणों से जो चूक गये बस खैर नही उन सालों की
जिन चमचों की मरी आत्मा,उनको ये आभाश हो गया
नेता जी को नमस्कार ना करो तो समझो नास हो गया
आइएएस और आइपीएस अधिकारी इसके चरण दबाऐं
बुद्धि- बल्लभ,वाणी-भूषण, इनसे भीख माॅंग कर खायें
लावारिस उद्योगपति भी , इन पर धन वर्षा करते है
चोर उचक्के, डाकू इनके दर्शन को तरसा करते है
राष्ट्र-नियन्ता तस्क देखो, आज परीक्षा पास हो गया
नेता जी को नमस्कार ना करो तो समझो नास होगया
लहु -लूहान कर भारत माता के टुकडे़ ये काट रहे है
मांस ,मदिरा ,वैष्यागामी शहर , गाॅंव को बांट रहे है
ये बने सरगना , मंत्री , संत्री छोटे - छोटे भागों से
बुन जाते हैे मकड़ी जाले, सढे़ हुये इन धागों से
अब तो चेहरा,चाल,चरित, व्यभिचारी अय्यास होगया
नेताजी को नमस्कार ना करो तो समझो नास होगया
इनके पग-चिन्हों पर बाबा , नंग, लंगोटी भी चलती है
धर्म-कर्म और ध्यान,धारणा राजनीति से ही पलती है
सत्ता और सियासी रण में सन्यासी को देख रहा हॅूं
बाबा जी के चौरासी आसन से नजरें सेंक रहा हॅूं
दूरदृष्टि का चिन्तन - मन्थन, ‘ भारत’ सूरदास हो गया
नेताजी को नमस्कार ना करो तो समझो नास होगया
भारत माता की छाती में राजनीति के लाख धडे़ हैं
सबके चरण पकडने वाले व्यभिचारी तैयार खडे है
मात, पिता के तृष्कारी को इनके चरण दबाते पाया
प्रजातंत्र में व्यभिचार ने संस्कारों को कैसे खाया
इस राजनीति कीनगर-वधू से भारत देवदास होगया
नेताजीको नमस्कार ना करो तो समझो नास होगया
चौबीस घण्टे चरने वाला बापू के गाने गाता है
सदाचार के आॅंख,कान,मुॅंह बंद किये सब कुछ खाता है
इनके हर धन्धे के पीछे नौकर शाही सहयोगी है
ये! साॅंड फल फूल रहे हैं जनता शदियों से रोगी है
राजनीति का सबसे सस्ता धन्घा ये अब खास होगया
नेता जी को नमस्कार ना करो तो समझो नास हो गया !!
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815
नेता जी को नमस्कार ना करो तो समझो नास हो गया
कोइ चमचा चरण पकड़ ले तो समझो वो खास हो गया
सुबह - सुबह लगती है लाइन चरण पकडने वालों की
चरणों से जो चूक गये बस खैर नही उन सालों की
जिन चमचों की मरी आत्मा,उनको ये आभाश हो गया
नेता जी को नमस्कार ना करो तो समझो नास हो गया
आइएएस और आइपीएस अधिकारी इसके चरण दबाऐं
बुद्धि- बल्लभ,वाणी-भूषण, इनसे भीख माॅंग कर खायें
लावारिस उद्योगपति भी , इन पर धन वर्षा करते है
चोर उचक्के, डाकू इनके दर्शन को तरसा करते है
राष्ट्र-नियन्ता तस्क देखो, आज परीक्षा पास हो गया
नेता जी को नमस्कार ना करो तो समझो नास होगया
लहु -लूहान कर भारत माता के टुकडे़ ये काट रहे है
मांस ,मदिरा ,वैष्यागामी शहर , गाॅंव को बांट रहे है
ये बने सरगना , मंत्री , संत्री छोटे - छोटे भागों से
बुन जाते हैे मकड़ी जाले, सढे़ हुये इन धागों से
अब तो चेहरा,चाल,चरित, व्यभिचारी अय्यास होगया
नेताजी को नमस्कार ना करो तो समझो नास होगया
इनके पग-चिन्हों पर बाबा , नंग, लंगोटी भी चलती है
धर्म-कर्म और ध्यान,धारणा राजनीति से ही पलती है
सत्ता और सियासी रण में सन्यासी को देख रहा हॅूं
बाबा जी के चौरासी आसन से नजरें सेंक रहा हॅूं
दूरदृष्टि का चिन्तन - मन्थन, ‘ भारत’ सूरदास हो गया
नेताजी को नमस्कार ना करो तो समझो नास होगया
भारत माता की छाती में राजनीति के लाख धडे़ हैं
सबके चरण पकडने वाले व्यभिचारी तैयार खडे है
मात, पिता के तृष्कारी को इनके चरण दबाते पाया
प्रजातंत्र में व्यभिचार ने संस्कारों को कैसे खाया
इस राजनीति कीनगर-वधू से भारत देवदास होगया
नेताजीको नमस्कार ना करो तो समझो नास होगया
चौबीस घण्टे चरने वाला बापू के गाने गाता है
सदाचार के आॅंख,कान,मुॅंह बंद किये सब कुछ खाता है
इनके हर धन्धे के पीछे नौकर शाही सहयोगी है
ये! साॅंड फल फूल रहे हैं जनता शदियों से रोगी है
राजनीति का सबसे सस्ता धन्घा ये अब खास होगया
नेता जी को नमस्कार ना करो तो समझो नास हो गया !!
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815
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