सर्कस देखो
प्रजातन्त्र का मन्दिर देखो,मन्दिर में भी बन्दर देखो
पूरे देश में बाढ तवाही, संसद भरा समन्दर देखो
लोक सभा में सर्कस देखो,तीर नही है तरकस देखो
चाल,चरित्र और चेहरों में भी,शब्द विषैले कर्कस देखो
तोते देखो, तोती देखो , खादी कुर्ते, धोती देखो
लोक सभा में चिल्लाते हैें, इनकी जरा बपौती देखो
कबर से मुर्दे जाग रहे हेैं, पागल होकर भाग रहे हैं
चील,गिद्व संग्राम सियासी, प्रजातन्त्र में दाग रहे हैं
राष्ट्र ध्वजा फहराने वाले पूरा वतन चबाने वाले,
लूट - लूट कर खाने वाले, खाकर भी गुर्राने वाले
लोकसभा में नाच रहे है, संविधान को बाँच रहे हैं
चोर-चोर की शक्ति, भक्ति , आशक्ति को जाँच रहे हैं
वशुन्धरा ,सुषमा और मुण्डे,खडक रहे हैं सबके कुण्डे
शिवराज और अरूण जेतली, बोल रहे है सबको गुण्डे
अपना मोदी मौन पडा है,लन्दन वाला बोल रहा है
एक दूसरे की चोरी को, पक्ष, विपक्षी खोल रहा हेै
दागी, बागी और अनुरागी भी मौके को देख रहे हैं
सभी विभीषण राम नाम के पत्थर जल में फेंक रहे हैं
कांग्रेस के सहयोगी भी जाँचो से भयभीत खडे हैं
धार तेल की देख रहे हैं सबके अपने अलग धडे हैं
हर खबरो में राहुल, मोदी और केजरी आम हो गये
तीन तिलंगे, तीनो पंगे, राजनीति पैगाम हो गये
लोकसभा और राज्य सभा की कक्षांये भी भंग हो गयी
जनता के वोटों की कीमत, बीहड में बदरंग हो गयी
डाकू -डाकू के कच्छो को बे-शर्मी से खोल रहे हैं
मिली-जुली कुस्ती के माहिर,सभी केसरी बोल रहे हैं
अरब-खरब के खर्चे, संसद के सत्रो में लुट जाते हेैं
कवि आग ये डाकू देखो मिल-जुल कर भारत खाते हैं।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा ;(आग )
मो0 9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com
प्रजातन्त्र का मन्दिर देखो,मन्दिर में भी बन्दर देखो
पूरे देश में बाढ तवाही, संसद भरा समन्दर देखो
लोक सभा में सर्कस देखो,तीर नही है तरकस देखो
चाल,चरित्र और चेहरों में भी,शब्द विषैले कर्कस देखो
तोते देखो, तोती देखो , खादी कुर्ते, धोती देखो
लोक सभा में चिल्लाते हैें, इनकी जरा बपौती देखो
कबर से मुर्दे जाग रहे हेैं, पागल होकर भाग रहे हैं
चील,गिद्व संग्राम सियासी, प्रजातन्त्र में दाग रहे हैं
राष्ट्र ध्वजा फहराने वाले पूरा वतन चबाने वाले,
लूट - लूट कर खाने वाले, खाकर भी गुर्राने वाले
लोकसभा में नाच रहे है, संविधान को बाँच रहे हैं
चोर-चोर की शक्ति, भक्ति , आशक्ति को जाँच रहे हैं
वशुन्धरा ,सुषमा और मुण्डे,खडक रहे हैं सबके कुण्डे
शिवराज और अरूण जेतली, बोल रहे है सबको गुण्डे
अपना मोदी मौन पडा है,लन्दन वाला बोल रहा है
एक दूसरे की चोरी को, पक्ष, विपक्षी खोल रहा हेै
दागी, बागी और अनुरागी भी मौके को देख रहे हैं
सभी विभीषण राम नाम के पत्थर जल में फेंक रहे हैं
कांग्रेस के सहयोगी भी जाँचो से भयभीत खडे हैं
धार तेल की देख रहे हैं सबके अपने अलग धडे हैं
हर खबरो में राहुल, मोदी और केजरी आम हो गये
तीन तिलंगे, तीनो पंगे, राजनीति पैगाम हो गये
लोकसभा और राज्य सभा की कक्षांये भी भंग हो गयी
जनता के वोटों की कीमत, बीहड में बदरंग हो गयी
डाकू -डाकू के कच्छो को बे-शर्मी से खोल रहे हैं
मिली-जुली कुस्ती के माहिर,सभी केसरी बोल रहे हैं
अरब-खरब के खर्चे, संसद के सत्रो में लुट जाते हेैं
कवि आग ये डाकू देखो मिल-जुल कर भारत खाते हैं।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा ;(आग )
मो0 9897399815
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