Wednesday, July 15, 2015

                            आरक्षण
देश में फिर आरक्षण का जिन बोतल से बाहर आया
फिर से प्रजातन्त्र  में एस.सी,एस.टी  कोटा लहराया
अगडों,पिछडी  सैना   में  महाभारत  संग्राम मचा है
संविधान के  हर पन्ने में,  राजनीति,कोहराम रचा है

सभी सियासी अपना जनमत  आरक्षण में ढूॅंढ रहे हैं
खुंडे   चाकु ,छूरों  से नर - मुंड  झुण्ड  के मूॅंड  रहे हैं
कामुकता की वर्ण-शंकरीे नश्लों  ने क्या मोड़ लिया हेै
ब्राह्मण, ठाकुर,वैश्य,शूद्र का पैमाना  भी तोड़ दिया है

रक्त-चाप का क्रन्दन, बन्धन  दौडेगा  हर  चौराहों में
वर्णशंकरी जनमत,जनता,राजनीति की गलबाॅंहों में
अब तो मुझे भी  शक  होता  है बच्चों के संस्कारों में
काम - वाशना  बना  रही   है परम्परायें  सरकारों में

मेरे  घर  की  आॅंगन - बाडी , बीज  पडा परदेशी का
संस्कार  स्वयं ही बोल रहा है,पौधा किसी कुरैसी का
ठाकुर, पण्डित, वैश्य, शुद्र के  बीज पडे़ अय्यासी से
अपने  घर  की   खेती   बंजर, हरियाली  है दासी से

कंहा - कंहा  ढूॅंढो आरक्षण ,इन  खूनों के मजमूनो में
कैसी - कैसी   हरकत  है  नश्लों  के  नब्ज  नमूनो में
कैसे   पहचानोगे     कोटे ,   खोटे   और   लंगोटे को
प्रजा-तन्त्र  की  अय्यासी  में  ढूॅंढो   उस  परकोटे को

आरक्षण  क्याें  माॅंग रहे  हो जन्म - जात  पैमाने से
शदियों   से   प्रमाण  कर्म  है ,खाने  और कमाने से
शिक्षा ,दीक्षा  और समीक्षा को जीवन आधार बनाओ
नयी कौम को आरक्षण की राजनीति से ना भटकाओे

हर गरीब  को आरक्षण  की उस परिधी में लाना होगा
हर तपके की शिक्षा सम हो,ऐसा नियम बनाना होगा
उंच-नीच  की राजनीति  को दिल से दूर भगाना होगा
भारत  माता  के  बच्चों  का सबका एक घराना होगा

ये मापदण्ड स्वीकार करो  बस  सबसे सस्ता नुक्ता है
हास्य-व्यंग की कविता में हर षब्द यहाॅं पर पुख्ता हेै
आरक्षण  आधार   बनाओ डी. एन. ए , की  जाॅंचो से
असर ‘आग ’का  होता  है, जलते शब्दों  की आॅंचो से!!
                  राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
                              ऋशिकेष
                        मो09897399815
           rajendrakikalam.blogspot.com 

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