सियासत के चेहरे
राजनीति के कोठो पर चढना आसान नही होता
चढा तो समझो,जीवन में उसका सम्मान नही होता
चाल, चरित्र और चेहरो से, स्पष्ट दिखायी देता हेै
हर लंच , मंच ,प्रपंचो पर ये कुष्ट दिखायी देता है
झूठ, कपट, छल,बल ,दल, से, सत्ता की सीढी बनती है
भश्ट व्यवस्था सासन की, झूठे भाषण से तनती है
अययास,निकम्मे पन से ही ये रूप निखर कर आता है
फिर पजातन्त्र के जनमत से ,नेता उत्पात मचाता है
कांग्रेस हो, बी.जे.पी. या स.पा., बा.स.पा. के दल हो
ममता,समता,ललिता हो,लालू,नितीश के भी छल हो
शिव सैना हो,बजरंगी हो या आर.एस.एस. की टोली हो
मुशलमान के फतवे हो या धर्म ,मजहब की बोली हो
कोई अन्ना हो या राम देव, ये जनमत से ही चलता हेेै
सब अहकार भी जनता की भीडो से तनकर पलता है
कही तामस है,कही सत,रज है,इतना हीअन्तर होता है
नेता , अभिनेता जनता मे सम्मोहन मन्तर बोता हेै
मेहनत और मजदूरी का कही नाम नही हेै दुनिया में
ईमान से जीने वालो का सम्मान नही है दुनिया में
गाँधी बनना चाहते है,कोई काम नही कोई धाम नही
ये छिपी हुयी अय्यासी है, जिसका जग मे पैगाम नही
हम सब सम्प्रदाय के कीडे है जो रेंग रहे है कीचड में
अपने पर विस्वास नही,विस्वास है,जनमत लीचड पर
कितनो को बाप बना डाला, अब तक पनप नही पाये
कवि आग इस बरगद के नीचे पौधे ही कुम्हलाये।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
मो0 9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com
राजनीति के कोठो पर चढना आसान नही होता
चढा तो समझो,जीवन में उसका सम्मान नही होता
चाल, चरित्र और चेहरो से, स्पष्ट दिखायी देता हेै
हर लंच , मंच ,प्रपंचो पर ये कुष्ट दिखायी देता है
झूठ, कपट, छल,बल ,दल, से, सत्ता की सीढी बनती है
भश्ट व्यवस्था सासन की, झूठे भाषण से तनती है
अययास,निकम्मे पन से ही ये रूप निखर कर आता है
फिर पजातन्त्र के जनमत से ,नेता उत्पात मचाता है
कांग्रेस हो, बी.जे.पी. या स.पा., बा.स.पा. के दल हो
ममता,समता,ललिता हो,लालू,नितीश के भी छल हो
शिव सैना हो,बजरंगी हो या आर.एस.एस. की टोली हो
मुशलमान के फतवे हो या धर्म ,मजहब की बोली हो
कोई अन्ना हो या राम देव, ये जनमत से ही चलता हेेै
सब अहकार भी जनता की भीडो से तनकर पलता है
कही तामस है,कही सत,रज है,इतना हीअन्तर होता है
नेता , अभिनेता जनता मे सम्मोहन मन्तर बोता हेै
मेहनत और मजदूरी का कही नाम नही हेै दुनिया में
ईमान से जीने वालो का सम्मान नही है दुनिया में
गाँधी बनना चाहते है,कोई काम नही कोई धाम नही
ये छिपी हुयी अय्यासी है, जिसका जग मे पैगाम नही
हम सब सम्प्रदाय के कीडे है जो रेंग रहे है कीचड में
अपने पर विस्वास नही,विस्वास है,जनमत लीचड पर
कितनो को बाप बना डाला, अब तक पनप नही पाये
कवि आग इस बरगद के नीचे पौधे ही कुम्हलाये।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
मो0 9897399815
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