आप का पाप
आप पार्टी आम हो गयी, चलती गाडी जाम हो गयी
जो दिल्ली पैगाम बनी थी,आज केजरी -धाम हो गयी
आशूतोष, संजय, कुमार की बातें झण्डू-बाम हो गयी
अब तक ये हेयरड्रेसर थे,सडकछाप हज्जजाम हो गयी
योगेन्दर, प्रशान्त, प्रोफेसर बुनियादों को झाँक रहे है
आप पार्टी के बछडे भी खेत की मिट्टी आँक रहे है
भूमिधर अरविन्द केजरी, पट्टा लेकर घूम रहा है
हिटलर सढसठ फौजी लेकर ,जंग सियासी चूम रहा है
एक नया टेढा पत्थर ,खेतान नींव को हिला रहा हेै
विषमन्थन का झाग,घाघ ये नेताओं को पिला रहा हेै
छोटे - मोटे रंग-रूट भी अपने असलहे झोंक रहे हैं
स्टिंग आप्रेशन को सुन कर सारे चैनल भौंक रहे हेैं
अन्ना का आदर्श केजरी, स्वयं ट्रेजरी बन जाता है
अहंकार में चूर, शूर ये राष्ट्र - गीत अपना गाता है
उँट, अश्व, पैदल, प्यादे सब, इसकी इज्जत बचा रहे हैं
नये ढंग की राजनीति में, चौपड - पासे सजा रहे हैं
स्वाभिमान की राजनीति में गाली देना एक कला है
गन्द लपेटे सुन्दर शब्दों वाला नेता आज भला है
नाप तोल कर बोल केजरी, राजनीति सौगात नही है
नये-नये मुल्लों की बाँगे, मस्जिद की औकात नही है
बुनियादों के हिल जाने से भवन स्वयं ही गिर जाते है
राजनीति में हल्के पन ही,राजनीति से घिर जाते है
अहंकारअस्तित्व स्वयं का,चढकर ही तो खुद खोता है
कवि आग बस,चलने का प्रमाण पहुँचना ही होता है।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
मो0 9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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