सम्मान का अपमान
आजादी को देने वालों की भारत में बात नही है
चन्द्रशेखर,सूभाष,भगत क्या ये भारत की जात नही है
इनके रण कौशल को सारी दुनिया अब भी मान रही हेै
बुनियादो के इन पत्थरों से भारत की पहचान रही है
लगता है भारत में बुनियादों की भी औकात नही हैै
आजादी को देने वालों की भारत मे बात नही है
आजादी के सभी सिपाही मर - मर सुख भोग रहे हैं
ना जाने कितने अर्जी-फर्जी आभिलेखों में रोग रहे हैं
जिनके कारण सुख सुविधा है,उनका कोई नाम नही है
अब चौराहो की प्रतिमाये ,वीरो का पैगाम नही है
ये समुद्र है, ताल, तडागो की कोई बर्षात नही है
आजादी को देने वालों की भारत में बात नही है
क्यों करते हो याद उन्हें तुम, खुल्ला बोल नही सकते हो
क्या कीमत है उस शहीद की जिसको तोल नही सकते हो
क्यों करते हो ऐसा नाटक अपमानो के एहशानो से
क्या मतलब है राजनीति का भारत के इन परवानो से
फाइल में उनको ढूंढोगे, ये उनके जज्बात नही हेै
आजादी को देने वालों की भारत मे बात नही है
सभी सिपाही पढे लिखे थे सुख का जीवन जी सकते थे
अपमानो को धन-दौलत के कारण भी तो पी सकते थे
हम जैसे कीडो के कारण वो हंसकर शूली चढ जाते हैं
राजनीति के उलट-फेर में पतझड जैसे झड जाते हैं
गाँधी और जवाहर से क्या उनका कोई साथ नही है
आजादी को देने वालों की भारत मे बात नही है
वो गर्म दलों के नेता थे, ये शीतल थे अभिनेता थे
वो खून, जोश के क्रेता थे, ये सूखी सरिता खेता थे
उनके जूनून में आजादी, इनके जूनून में दास प्रथा
उनको ये हूकूमत खलती थी,इनकी थी सत्ता मात्र व्यथा
अपमान शहीदों का होता हेै, छोटी - मोटी घात नही है
आजादी को देने वालों की भारत मे बात नही है
दुखः होता हेै जिनके कारण अब तक हम सब जिन्दा हेै
क्यों भारत हम जैसे नालायक पुत्रों से शर्मिन्दा हेै
अब भी थोडी इज्जत हो तो ढूंढो उन अवशेषों को
हृदय सेे सब करो नमन उन परं राष्ट्र के भेषों काे
ये कवि आग की पीडा है,कोई हल्का सा संघात नही हेै
आजादी को देने वालो की भारत मे बात नही है।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
मो0 9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com
आजादी को देने वालों की भारत में बात नही है
चन्द्रशेखर,सूभाष,भगत क्या ये भारत की जात नही है
इनके रण कौशल को सारी दुनिया अब भी मान रही हेै
बुनियादो के इन पत्थरों से भारत की पहचान रही है
लगता है भारत में बुनियादों की भी औकात नही हैै
आजादी को देने वालों की भारत मे बात नही है
आजादी के सभी सिपाही मर - मर सुख भोग रहे हैं
ना जाने कितने अर्जी-फर्जी आभिलेखों में रोग रहे हैं
जिनके कारण सुख सुविधा है,उनका कोई नाम नही है
अब चौराहो की प्रतिमाये ,वीरो का पैगाम नही है
ये समुद्र है, ताल, तडागो की कोई बर्षात नही है
आजादी को देने वालों की भारत में बात नही है
क्यों करते हो याद उन्हें तुम, खुल्ला बोल नही सकते हो
क्या कीमत है उस शहीद की जिसको तोल नही सकते हो
क्यों करते हो ऐसा नाटक अपमानो के एहशानो से
क्या मतलब है राजनीति का भारत के इन परवानो से
फाइल में उनको ढूंढोगे, ये उनके जज्बात नही हेै
आजादी को देने वालों की भारत मे बात नही है
सभी सिपाही पढे लिखे थे सुख का जीवन जी सकते थे
अपमानो को धन-दौलत के कारण भी तो पी सकते थे
हम जैसे कीडो के कारण वो हंसकर शूली चढ जाते हैं
राजनीति के उलट-फेर में पतझड जैसे झड जाते हैं
गाँधी और जवाहर से क्या उनका कोई साथ नही है
आजादी को देने वालों की भारत मे बात नही है
वो गर्म दलों के नेता थे, ये शीतल थे अभिनेता थे
वो खून, जोश के क्रेता थे, ये सूखी सरिता खेता थे
उनके जूनून में आजादी, इनके जूनून में दास प्रथा
उनको ये हूकूमत खलती थी,इनकी थी सत्ता मात्र व्यथा
अपमान शहीदों का होता हेै, छोटी - मोटी घात नही है
आजादी को देने वालों की भारत मे बात नही है
दुखः होता हेै जिनके कारण अब तक हम सब जिन्दा हेै
क्यों भारत हम जैसे नालायक पुत्रों से शर्मिन्दा हेै
अब भी थोडी इज्जत हो तो ढूंढो उन अवशेषों को
हृदय सेे सब करो नमन उन परं राष्ट्र के भेषों काे
ये कवि आग की पीडा है,कोई हल्का सा संघात नही हेै
आजादी को देने वालो की भारत मे बात नही है।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
मो0 9897399815
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