Monday, March 30, 2015

                     बाढ की आड में ताढ
काश्मीर   की   बाढ  तवाही,  चिन्ता  मे  दिल्ली  डूबी है
मौत  किसानो  की  खेतों  में,ये  भी  दिल्ली  की खूबी हेै
उनका जीवन महत्वपूर्ण है, हवाई जहाज से धन बर्षाओ
अन्नदाता  की  मजबूरी  है,उसको  बस धीरज बंधवाओ

हवाई  जहाज  से नीचे झाँको ,देखो,परखो जाँच बिठाओ
एक - एक  गेंहू  की  बाली  हर  खेतों  से  दिल्ली  लाओ
काश्मीर  के   बोट - बैंक पर , सारे   नेता  सेंध  लगाओ
ऐसा  मौका कंहा  मिलेगा, जाओ मिलकर  लाभ उठाओ

आंशू  पोछो, मौके  बोचो, मुशलमान  को  गले  लगाओ
चन्दा  देखो, धन्दा  देखो, उनको   बाँटो, खुद   भी खाओ
ये  ईश्वर  की  बडी  कृपा  है,  कितने  मौके   भेज रहा हेेै
अब  मरने  वाले  मरे  जा रहे, हमको  वो  सहेज  रहा है

भारत  के  मजदूर,किसानो  को  तो  हम भी  देख रहे है
जंहा  चुनाव  होने  वाले  हैं, वंही  पर   टुकडे  फेंक रहे है
शब्दो के मरहम  की  पट्टी ,करने में हम  सब माहिर हेै
बहुमत की सरकार देश में,ये  किस्सा भी  जग जाहिर है

अच्छी-अच्छी  नसल  के  तोते  हर चैनल में डाल रहे है
हम   शब्दो   के   सौदागर  है, शब्दो  से  ही पाल  रहे है
अब अच्छे  दिन  आने  वाले  हेैं, हवा  में नंगे देख रहे हेैं
इस  प्रजा-तन्त्र  में  सारे  गंजे,  नेता   कंघे  फेंक  रहे हेैं

नेता  की  कुछ  खता  नही  हैे  प्रजातन्त्र  अन्धा होता है
नेता तो  वो  सघा  गधा  हेै जनमत  का   बोझा ढोता है
हम  शब्दो  के चकव्यूह  में, अभिमन्यु  है ,फंस जाते है
कवि  आग  तो  चिन्गारी  से  षडयन्त्रो  को समझाते है।।
                 राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
                      मो0 9897399815
          rajendrakikalam.blogspot.com

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