Friday, March 27, 2015

                  ज्वाला में बाला
राम  नवमी  आज  है, पर  रावणों  का  राज है
जिन सिरों पर ताज है,ये उन सिरों की खाज है
सीता  यहां  मोहताज  है, सूपर्णखां पर नाज है
ये  राजनीति  आज  है,बस,धर्म का अन्दाज है

टूटती   हैं   डालियाँ, फिर  फूटती   हैं  थालियाँ
बज  रही  हैं  बालियां, अब  छूटती  हैं लालियां
कट रही  हरियालियां, बस, बँट रही हैं नालियाँ
गूंजती  हैं  गालियाँ  क्यों, बज  रही हैं तालियाँ

पूजती  कन्या  घरों  में, भ्रूण  हत्या  हो रही है
देखकर इन  बालिका  को, आज दुर्गा रो रही है
आडम्बरों  से  दूर  हो,मां के प्रणय को जानिये
ऱाष्ट्र की इन पुत्रीयों को  भी  तो  चण्डी मानिये

प्रण करें सब बालिकायें, तन  ढकें सब लाज से
अंग की ये नंग  छवियां,ना  दिखे फिर आज से
संकल्प में हो,हर युवक अश्लील के इस काज से
अब देवता बनकर दिखें,सब देव के अन्दाज से।।
               राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
                     मो0 9897399815
          rajendrakikalam.blogspot.com

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