Sunday, December 21, 2014

            धरम् के धन्धे करम् के अन्धे
वेद पुरान का छाता देखो,राम ,कृष्ण  की गाथा देखो
भीड़ भयंकर तांता देखो,धरम्  करम्  का खाता देखो
वक्ता कैसा बोल रहा  है, धनिक  कौन  है  तोल रहा है
कथा में किस्से खोल रहा है,मन पागल है डोल रहा है

दीन दुखी  की  भीड़  जमा  है, सुनने वाले खूब रवां है
नर नारी  का  खूब  संमा  है,फिर झगड़ा नहीं थमा है
देखो राम कृष्ण  की बातें, एक धरम में कितनी जातें
धन देखो  कितना  हैं खाते, कैसे  कटती  इनकी रातें

मुल्ला के उपदेश भी देखे,इस धरती में क्लेष भी देखे
धरम करम  के  द्वेश  भी देखे, कैसे  हैं दरवेष भी देखे
अब तो सिर्फ ईसाइ  हस्ती, पैग  हाथ  में देखो मस्ती
मजहब कीमती कौमें सस्ती,देखो कैसी हालत खस्ती

एक जमीं  जंहा  एक है, अल्लाह , ईश्वर  सभी नेक है
जल में कैसी खींची रेख है,कर्म गति का अटल लेख है
भिक्षु   नंगे   चलते   देखे,  धर्मो  से  मठ  पलते  देखे
बन  में  जोगी  गलते देखे,  खाली  हाथ  मसलते देखे

राधास्वामि  भीड़  है भारी, निरंकार की महिमा न्यारी
गुरुद्वारों  में  लंगर  जारी, धरम  का धन्धा है लाचारी
देखो सबका एक विधाता,फिर ये धन्धा क्यों भटकाता
देखो  धरम्  करम्  का नाता, कैसी आग लगाई भ्राता

मजहब शान्त कहां होते हैं, अपने घर को क्यों खाेते हैं
अब  तो  मुर्दे भी रोते हैं, धरम् मजहब को क्यों ढोते हैं
बैर मजहब  में  क्यों होता है, बन्दा घुटके क्यों रोता है
मूल्य धरम्  का क्यों खोता है, सारा धन्धा ही थोता है

भगवानों  की  माया  देखेा,  चमक भक्त में काया देखो
महाकाल   की  छाया  देखो, मुर्खो  ने  भरमाया  देखो
हर शरीर  में तत्व पांच हैं,फिर भी तनमें लगी आंच है
धरम् धरा में  बिछी  कांच है,पड़े भरम् में कहां सांच है

गऊ,गंगा,गायित्री  खोती,मस्जिद मुल्ला देख के रोती
ईसा,मैरी भीड  को ढोती, गुरूग्रन्थ अब महज है पोथी
बुध्द,जैन में देख चुनौती,सब की अपनी अलग बपौती
कुछ बची खुची औकातें खोती,पनप रहे हैं तोता,तोती

पशुओं  को कुछ  सुन्दर  पायासुन्दरता में भोली काया
नभ में  देख परिन्दा  छाया, सब के ऊपर रब की माया
अन्दर सबके एक खुदा है,फिर क्यों बन्दा जुदा जुदा है
भगवान भक्त तालाक शुदा  है ताकत वाला वही खुदा है।।
          राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
                मो0 9897399815
       rajendrakikalam.blogspot.com

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