Wednesday, December 17, 2014

      ना समझी का उत्तराखण्ड
मै  तो एक परिन्दा हूॅं  कविता में व्यंग दरिन्दा हॅूं
एक छोटे पद का बाबू हॅूं जो  पहले से बे - काबू  हूॅं
जनमानस में भाव जगा था नया राज्य बनवायेंगें
सुख सुविधा से इस प्रदेश का भारतभाल सजायेंगें

ना समझी की उत्सुकता ने घर घाट से खो डाला है
जनता नंगी घूम रही है बस  नेता   ही  मतवाला है
सूबे  के सरदार  बनेगें दल - बल   से  मंत्री  आयेंगें
कई जन्मों के दुख  दरिद्र पाॅंच साल में धुल जायेंगें

राजनीति की दुर्वाशना खण्ड-खण्ड से खुष  होती है
हल्केपन की राजनीति से  नई  पीढियाॅं  ही  रोती हैं
केन्द्र समर्पित हो जाते तो  जीवन स्वालम्बी  होता
उत्तराखण्ड  का जन-मानस क्यों  भ्रष्टाचारों से रोता

उत्तराखण्ड बनाया हमने क्या खोया क्यापाया हमने
जनता के थे क्या-क्या सपने यहाॅंतो लूट रहैं हैं अपने
लूट रहे है सेवक घर को जनता  का क्या भला  करेगें
उत्तराखण्ड की देव भूमि को राॅड,भाॅंड और साॅंड चरेंगें

पलता  था  जीवन  घ्याडी में अब घूम रहैं हैं गाडी में
मुर्ग   मसल्लम  चलता है ,जीते  थे  धबडी  बाडी में
घर  में  नही  झंगोरा  था  अब   बासमती की बातें हैं
परेशान   थे   भाडे   से   अब   बत्ती   लाल  घुमाते हैं

तृष्कार का जीवन था अब संग में डी.एम डोल रहा है
राजनीति की कृपा से  बस  भ्रष्ट जोर  से  बोल रहा है
मुशकिल था लखनउ जाना अब तो देहरादून ठिकाना
देख  के नेता गली-गली  में श्वान-देव ने भी पहचाना

कोई पौडी का कोई टिहरी का ये कैसा खेल जगीरी का
कुमाॅंऊ  यहाॅं पर  भारी  है  बस,दोनो कौम भिखारी हैं
क्या  विकास  की बोली है बस, भरती अपनी झोली है
हर  नेता   यहाॅं   अधूरा   है चमचों का   रूतबा पूरा है

कोई नेगी है कोई  रावत है  हर पद  के पीछे  दावत है
विस्थापित  बशवाने  हैं पर   अपने   नही   ठिकाने हैं
सभी  मुवावजा खातें  हैं  नाली  का  बिगाह बनाते  हैं
भू - माफिया भारी  है  बस  मालिक  यहाॅं  भिखारी है

उत्तराखण्ड  में  इस्क समाया  नेता से इन्दर घबराया
उर्वषी ,मेनका ,रम्भा गायब देखा तो मंत्री  संग  पाया
अय्यासी का जो फन देखा हुआ इन्द्र को खुद में घोखा
बोला  चलो  मेनका  दीदी  यहाॅं  का नेता बडा अनोखा

ये  राज  नही अब  राग बना 36व्यंजन का साग  बना
जो  राजसभा  को  भातें  हैं  वो  उत्तराखण्ड  से जाते हैं
बाण  नही  बस  तरकस है ये देव भूमि अब  सरकस है
सबकी  नजरों  में टुकडा है ये कैसा गजब का जुकडा है

अधिकारी  सब पर भारी है बस,खेल उन्ही  का जारी है
नेता  की  हस्ती  पहचानी   करते  हैं  अपनी मनमानी
नौकर से  मालिक डरता है फिर दोनों का  घर भरता है
इनकी  ही  कलमें चलती  हैं  फाइल से  सत्ता पलती है

खर्चा  कई  लाख  करोडों  में बस, माल नदारद रोडों में
फाइल  में  सडक  बनाते हैं ये खुल्लम खुल्ला  खातें हैं
जो  भी सत्ता में आता  है  अपना   ही   खेल दिखाता है
पाॅंच  साल  का  करा  धरा  उसमें   भी जाॅंच बिठाता है

विद्यालय   बन    जाते    हैं   बच्चे   भी   फर्जी  आते हैं
जो अन्न मिला सरकारों से मिल बाॅंट सभी  खा जाते हैं
वेतन  भी  अच्छा  पाते  हैं  शिक्षक   सरकार  हिलातें हैं
गुरूजी  तो  घर  में रहतें  हैं  ये  शिशू निकेतन कहते हैं

शिक्षक  हडताले  करते   हैं   शिक्षा   मंत्री   भी  डरते हैं
बस,  माॅंगे  पूरी  होती  हैं  बच्चों  की  किस्मत रोती हैं
गुरूजी  के   बच्चे   अंग्रेजी   स्कूल   में   शिक्षा  पाते हैं
उत्तराखण्ड   के   नव-अंकुर  इन  पहाडों  में सड जाते हैं

नदियाॅ तो हिम से झरती हैं जनता प्यासी क्यों मरती है
पाताल  से  पानी  लाना  है  पहाडों  में  पम्प  लगाना है
पानी  से  बिजली  गायब  है ये  कैसी  बात  अजायब है
बे - सिर   पैर   की   बातें   हैं   ये  नेता  की  औखातें हैं

शिखरों  में   रेल  बिछाायेगें  ये  कैसा  खेल  खिलायेगें
बस, गैरसैंण  की  बातें  हैं  कुछ  इसी बात की  खातें हैं
घर - घर में खाने  के लाले ,दो  चार बने  बस  मतवाले
भाषण  में  कैसी  भांषा  है   ये   उत्तराखण्ड  तमाशा  हैं

गुल चमन  है इनकी बातों में रिस्ता है कितनी जातों में
कहीं  नदी  वार कहीं  नदी  पार  ये कैसा युद्व अनाथों में
यहाॅं  पुरूष  घूमते   बाडों  में  नारी  है  नरक  पहाडों  में
शिखरों में सूरजअस्त हुआ गढवाल का भैजी मस्त हुआ

नीचे   से   दारू  ढोते   हैं   उत्पात   यहाॅं  पर  होते  हैं
खडा  कौन  है  पाॅंओं  पर  घर  बार   लगा  है दाॅंव पर
आज  हिमालय लुटता है  घर - घर  में रिस्ता  टुटता है
ये ! देव  भूमि  की  लीला है यहाॅं लाल खून भी पीला है

घर  से ही माल  उठाता  है  व्यापारी  खूब  कमाता है
यहाॅं  हर  देश का  मानव है ये देव भूमि अब दानव है
संस्कार  गये  अब  पानी  में  ये बूढी कौम जवानी में
नेता में देखो  लाली है बस,  उत्तराखण्ड  ही  खाली है

राज्य लूटकर  चन्दा  भी दिल्ली के  दल  में  जाता है
उत्तराखण्ड को  राजनीति का  मरा  भूत  भी  खाता है
क्यों   होते   हैं  रोज  फैसले  राजनीति  गलियारों से
मुख्यमंत्री   बदल    रहे    है   दिल्ली   के   दरबारों से

भीख माॅंगकर  उत्तराखण्ड  को  स्वीटजरलैंड बनायेंगे
स्विस  बैंक  के  सारे  खाते  उत्तरारखण्ड   में  आयेंगें
सपने   देखो    अपने   देखो   राजनीति   ये  गाती  है
अब  तो  टुच्चेपन के भाशण से  भी जनता शर्माती है

सबसे  ज्यादा  उत्तराखण्ड  में  रामदेव  की  धरती है
योग - पीठ  गलियारे  में सरकारें  पानी    भरती हैं
सारे  आसन  राजनिति  के   टी 0वी0    दिखलाते है
सत्ता   और   सियासत   की   कपाल  भारती  गाते है

पातंजलि  के  योग  सूत्र  से स्वाभिमान  को गाता है
एक लंगोटा दस  साल  में  दुनिया   में  छा जाता है
छिपी  हुयी  है  बीस अरब  की  माया एक लंगोटी में
राम  देव  जी  भारत  को   देखो  गरीब  की  रोटी में

आज दिवाकर बादल के पीछे से छिपकर झाॅंक रहा है
मुख्यमंत्री सभी  विधायक ,यू0के0डी के भाॅंप रहा है
सत्ता और सियासत भी तो हड्डी मुॅंह में डाल रही है
यू0के0डी के नेताओं की ,क्षमता  को खंगाल रही है

प्रीतम सिह भी  पराधीनता में खुश है अब खेल रहा है
सोने की  हथकडी  पहनकर  सत्ता  का रथ ठेल रहा है
त्रिवेन्दर   के   हाथों  मेम भी , जंग  लगी  तलवारें है
यू0  के0 डी0  का   शीत   युद्व  ऐरी  के  वारे न्यारे हैं

ये  आधा  टुकडा  काॅंग्रेस  सत्ता में  कब  तक  ढोयेगी
अब बी.जे.पी. भी इस लावारिस खेती में कुछ बोयेगी
जिनको मिला मुआवजा वो भी यू0के0डी0 से दूर हुये
सपने   आज   बढोनी   के  अपने  बच्चों  से  चूर  हुये

मचा  हुआ  है द्वन्द  यहाॅं  पर  नेता और विधायक में
कौन करेगा आज  फैसला  लायक  और नालायक में
बाल   नोचते   आज   बढोनी  रोते   पागल  खाने मे
क्यों  होते  बलिदान  यहाॅं  पर उत्तराखण्ड बनाने में

लीजों  का  बै-नामा  है, सत्ता  का  अमली  जामा है
कृष्ण कनैह्या नेता हैं, बस, जनता यंहा   सुदामा है
भू-माफिया  ग्राम  सभा  की  लीजों को खा जातें हैं
हेरा - फेरी  की   लिस्टों  में  कुछ बाबा  भी आतें हैं

पंगों  से  हर  कोई  डरता  है,  नंगा  यहाॅं निखरता है
पटवारी  और  रजिष्ट्रार , फिर दोनो  का घर भरता है
फार्म  हाउस  बनतें  हैं फिर  खेल  सियासी  चलतें हैं
दुनिया  भर  के  भूखे - नंगेे   उत्तराखण्ड  में पलते हैं

नई   पीडी  में  काम  नही  है  राजनीति  में  आयेगी
फर्जी  निर्माण दिखा  करके  सत्ता  से  हाथ मिलायेगी
जिला  गाॅंव और पंचायत में नये- नये खे खिलायेगी
उत्तराखण्ड  में  हेरा - फेरी  अब  यौवन  में  आयेगी!!
              राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
                   मो0 9897399815
       rajendrakikalam.blogspot.com                 

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