Wednesday, December 24, 2014

            भारत रत्न की सियासत

जिसमें हूनर है  चमचमाने  का  चमकता जायेगा
उसकी चमक का गीत  ये  जहान  हरदम गायेगा
इस तरह  उस रत्न  को  परिधी  में  लाना छोड दो
इतिहास हिन्दूस्तान का  बाजार  में बिक जायेगा

राष्ट्र - गौरव  रत्न  जनमत  भीड   में  मत  खोइये
इस  बैरता  का  बीज   भारत  रत्न  से   ना  बोइये
हूकूमते  जज्बात   के  आघात  से  चलती नही हैं
गरिमा वतन  की कीचडो  के  कीच से मत धोइये

अब तो भारत  रत्न  भी चौराहों  पर  बिकने लगे हैं
हर सियासी आज  भारत  रत्न  क्यों दिखने लगें है
जिनके कारण  मजहबों  और  जातियों में हम बटें
अब वो ही  भारत रत्न  की  इबारतें  लिखने लगें है

सूभाष  तो वो  रत्न  है जो  मोल  में बिकता नही हैे
आज  भी बाजार में, वो  रत्न  क्यों  दिखता नही है
चन्द्रशेखर और  भगत  हम  को  नजर आते नही
हाट  में  बहुमुल्य  हीरा  भी  कभी  टिकता नही है

रत्न  अपनी   कीमतें   चौराहों   में   कब  बोलते है
रण-बांकुरे मरते  हैं अपनी  कीमतों  को खोलते हैं
अनुमान होता  है शहीदो  का, निपट जाने के बाद
हम सियासत  से शहीदों  के  कफन  को तोलते हैं

नेहरू,अटल,इन्दिरा से कम ना,बांकुरों कोआंकिये
इतिहास को पढिये,सहादत  पर भी थोडा झांकिये
रत्न  के  इस  यतन   से  अपमान   करना छोड दो
हो  सके   तो, इस  अहं  की  रूढियां  अब  तोड दो

इस आग  को  प्रमाण  देने  की खता मत कीजिये
समकक्षता  चिन्गारियों  की सूर्य को मत दीजिये
चापलूसी  रत्न   भारत  का   कभी  बनती  है क्या
आग  के  दरिया  में  कपटों  से  लपट  ना पीजिये।।
          राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
                  9897399815
    rajendrakikalam.blogspot.com

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