Saturday, December 27, 2014

  अब  युवा  इस  देश  का  बे-वक्त  बूढा  हो  गया
  एक रात में पैदा हुआ और ईश्क करके मर गया    
                 अब नर नही,किन्नर
हमें   नेता  बनादो   तुम  हम   वो   कर  दिखायेगें
वतन  की  आबरू   पर   भी  मिटेगे  मर दिखायेगें
झाडू   ही   लगाना  है   तो   सरहद   पर   लगायेगें
सुषमा  ने  कहा  था  हम   दश  नर - मुण्ड  लायेगें

अब तुम चूडियाँ  पहनो  हूकूमत  छोड  दो  हम पर
भरोसा करके देखो तो,इस किन्नर के दम-खम पर
ना  आगे  है  ना  पीछे  है, वतन  को  हम  बचायेगें
तिरंगा  हाथ  में   दे   दो, कंराची   तक   फहरायेगें

इस पाकिस्तान की हरकत से,कितने घर उजाडोगे
सियासत की सडक पर,अब कंहा तक तुम दहाडोगे
भरोसा  खो  चुकी  जनता, इन खादी  के नमूनो से
ये  सरहद लाल होती  है  क्यों  फौजो  के   खूनो से

तुम्हें  अब  है कंहा फुरसत,भारत माँ की छाती की
नेता  को  तो  चिन्ता  हेेै,वतन में और ख्याति की
वजीरों   का   चौराहो   में    चिल्लाना  अखरता हैेे
सरहद  का  सिपाही  क्यों  ,यंहा  बे-मौत मरता है

इधर  बंग्ला, उधर  चीनी भी, हमला रोज करते हैं
सियासी   कारनामे   तो, अब   सबको  अखरते हैं
ये  नैपाल  मण्डी  है, बस,  खुले  बाजार  में  घूमों
क्या  खाला  का  घर  है  ये, जंहा  चाहो वंहा झूमो

हम नाचेगें भी  गायेगें भी ,पर भारत को बचायेगें
हमें  मौेका  मिलेगा  तो ,हम  पाकिस्तान जायेगें
जूते   चार   मारेगें,  उन   शरीफो  के  नवाजों को
कुचल कर आयेगें उनके तवायफ तख्त,ताजों को

क्यों तुम्हारी  कूटनीति से यंहा  आवाम मरता हेै
क्यों तुम्हारा ये तरीका भी हम सबकोअखरता है
तुम्हारी बात सुन करके,यंहा कुछ आस जागी थी
ये  इतिहास  कहता  है कि ये सत्ता ही अभागी थी

किन्नर हैं,ना हिन्दू हैें,ना मुस्लिम हेैं सियासत में
हमें तो  नाच, गाना  ही  मिला हैे इस विरासत में
वतन  की  रोटियां  खाकर  हम  जीवन चलाते हेैं
हम  ना  मर्द  होकर  भी  वतन  के  गीत  गाते है

हमें  बस ,एक  मौका  दो  कुछ करके दिखाने का
हमें  बस  एक  मौका  दो, माँ  का  दर्द   गाने का
हम  फौजों  साये  में ही ,वो  कुछ  कर  दिखायेगें
जो  तुम  में  बुझी  है आग वो ,फिर  से जगायेगे।।
             राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
                  मो0 9897399815
        rajendrakikalam.blogspot.com
          

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