सही क्या है
हम सातअरब कीडे हेै दुनिया में हमको अभास नही हेै
क्या लक्ष्य हेै मानवता का ये हमको अहसास नही है
हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, इसाई,कौम कबीलो में डूबे हेै
मै भीअब तक समझ ना पाया मानव के क्या मंसूबे हेै
हम सातअरब कीडे हेै दुनिया में हमको अभास नही हेै
क्या लक्ष्य हेै मानवता का ये हमको अहसास नही है
हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, इसाई,कौम कबीलो में डूबे हेै
मै भीअब तक समझ ना पाया मानव के क्या मंसूबे हेै
धर्म, मजहब, जाति के झगडे,जानवरों में कब होते हेै
हम मानव होकर भी मानवता से अपने को खोते हेै
गुरूग्रन्थ,गीता,रामायणअौर कूरान ने क्या समझाया
बईबिलों के पढ.ने वालों को क्या यिशू ने भटकाया
हम मानव होकर भी मानवता से अपने को खोते हेै
गुरूग्रन्थ,गीता,रामायणअौर कूरान ने क्या समझाया
बईबिलों के पढ.ने वालों को क्या यिशू ने भटकाया
सबके अपने धर्म -गुरू हेै,फिर भी जहर उगलते देखा
सत्य,अहिंसा, दया,प्रेम की, कंहा खिंची है ऐसी रेखा
हर चैनल पर काग हंस से, उपदेशों में चिल्लाते हेै
सुनने वाले फिर भी देखो, कौम कबीलो को गाते हेै
सत्य,अहिंसा, दया,प्रेम की, कंहा खिंची है ऐसी रेखा
हर चैनल पर काग हंस से, उपदेशों में चिल्लाते हेै
सुनने वाले फिर भी देखो, कौम कबीलो को गाते हेै
क्यों देते हो नोबल प्राइज, ऐसी निष्ठुर मानवता को
धर्म-ग्रन्थ पेेैदा करते हेै,मनुष्य भेष में दानवता को
रिद्व-सिद्व चिल्ला कर मर गये, कोैन समझने वाला है
हमने तो भगवानो को भी हरदम पूजा से टाला हेै
धर्म-ग्रन्थ पेेैदा करते हेै,मनुष्य भेष में दानवता को
रिद्व-सिद्व चिल्ला कर मर गये, कोैन समझने वाला है
हमने तो भगवानो को भी हरदम पूजा से टाला हेै
बकरे काटो, मुर्गे काटो, मानवता की बलि चढाओ
बात प्रेम की करने वालो,मांस,रूधिर मानव का खाओ
छोटे-छोटे गली,मुहल्ले में महाभारत का पाठ पढाओ
खतना,चोटी,तिलक साथ में लेकर धर्म धाम में जाओ
बात प्रेम की करने वालो,मांस,रूधिर मानव का खाओ
छोटे-छोटे गली,मुहल्ले में महाभारत का पाठ पढाओ
खतना,चोटी,तिलक साथ में लेकर धर्म धाम में जाओ
दास कबीरा कह कर मर गये, हम तो बस दोहे गाते हेेै
गीता ,रामायण को सुनकर महाभारत को दोहराते है
गुरू लोग भी ये कहते हैं, धर्म-युद्व हेै, अस्त्र उठाओ
धर्म-कर्म के रखवालो, ये गीत द्वन्द्व के अब ना गाओ
गीता ,रामायण को सुनकर महाभारत को दोहराते है
गुरू लोग भी ये कहते हैं, धर्म-युद्व हेै, अस्त्र उठाओ
धर्म-कर्म के रखवालो, ये गीत द्वन्द्व के अब ना गाओ
दूनियाभर के सभी ग्रन्थ,बस दया प्रेम समझाते आये
हमने उनकी कबर बना कर,घृणा,क्लेश के गाने गाये
बहुत हो गया खून खराबा, मानव- धर्म बनाना होगा
कवि आग को समझोगे तो,वापस घर भी आना होगा।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com
हमने उनकी कबर बना कर,घृणा,क्लेश के गाने गाये
बहुत हो गया खून खराबा, मानव- धर्म बनाना होगा
कवि आग को समझोगे तो,वापस घर भी आना होगा।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815
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