Monday, December 15, 2014

  एक  खटमल  ने  कहा चिंघाड़कर
     कुछ ना पाओगे हमें तुम मार कर
     आप   से    ज्यादा  हमें  जूनून है
     मेरी  रगो  में  आपका  ही खून है।।
               धर्म और राजनीति
एक गर गोविन्द  है  तो अन्य कई शिशूपाल हैं
इस  अजूबे   देश   का   ये  राजनैतिक  हाल है
हर कारवाॅं बतला रहा  है  धर्म  की औकात को
फुटबाल बनकर पढ़गया हाथ को और लात को

नेता  बने  हर   धर्म   की   टीम   के  कप्तान हैं
पल में लय पल में  प्रलय,  कलयुगी भगवान हैं
अब तो बस,इतना  ही सोचो धूल में ना फूल दो
धर्म को बस, धर्म  समझो  बे  वजह ना तूल दो

नयी नश्ल  का उपयोग होता  है सियासतदार से
लुट रही  है  सल्तनत  क्यों  आज भी गद्दार से
क्यों मर रही है कोैम  हिन्दुस्तान की चौराहे में
क्यों   पनपती   हैे  जवानी , राजनीति  साये में

धर्म  में  घर  वापसी के सिलसिले भी चल रहे हैं
कालनिमी  भी सनातन  में अभी तक पल रहे है
इस धर्म से कब  तक  गरीबों को, गधे ये ढोयेंगें
कब  तलक  ये  बीज  घृणा  के  धरा  में  बोयेंगे

इनको  हमारी  क्या  पढी.लेटे हैं सूखी घास पर
तन में  लगती आग है सिकती है रोटी लाश पर
फिर दिखाते  हैं  दया, मजहब,  मरा  इन्सान है
अब तो  समझ  से  है परे क्या, खुदा भगवान है

आदमियत  सढ  गयी   धर्मान्धता   के  भाव से 
हर  लब्ज  उल्टा  पढ़  गया इस्लाम के प्रभाव से
देश  का  नेता  बिका  आदर्श   भी  बिक  जायेगा
हर  धरम  की  धृष्टता  इतिहास  लिखता जायेगा ।।
      राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा;आग
            मो09897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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