Tuesday, December 30, 2014

नव-वर्ष-2015
नव - वर्ष   मनाने  से  पहले,  ये  हर्ष  मानाने  से  पहले
उत्कर्ष   मनाने   से   पहले , आदर्श   दिखाने  से  पहले
अपने  दिल   के   भावों   को,  शीश  झुकाकर  तोलो ना
यें भारत है, इस भारत  को, बस, भारत- माता बोलो ना

हिन्दू, मुस्लिम  मीत  बने,हर जाति-पाँति नवनीत बने
ये गर्म  हवा  अब  शीत  बने, हर कौम कबीले गीत बने
तुुम सन्त, बसन्त  से  डोलो  ना,द्वार हृदय के खोला ना
यें भारत है, इस  भारत  को, बस,भारत- माता बोलो ना

भष्टाचार  हटे  दिल  से, व्यभिचार  हटे  इस  महफिल से
ईमान  बंटे  बस, तिल - तिल से,राष्ट्र दिखे हर मंजिल से
बस,भारत हो तन में मन में,इस रंग से अंग भिगोलो ना
यें भारत  है, इस  भारत  को, बस,भारत- माता बोलो ना

धर्म, मजहब   के   कूँओं  में, पाताल  का  पानी  एक रहे
सब भाँडे खडकाने बन्द  करो, बस, प्रेम  रवानी  एक रहे
हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, इसाई  हाथ पकड कर डोलो ना
यें भारत  है, इस  भारत  को, बस,भारत-माता बोलो ना

इस राम,कृष्ण की धरती में कुरान को इतना प्यार मिले
चमन में  कलियाँ  ईसा  की,निर्भय  होकर हर बार खिले
धर्म,मजहब  के फूलों में स्वछन्द सी गन्ध को घोलो ना
यें  भारत  है,इस  भारत  को, बस,भारत-माता बोलो ना

हो चैत्र मास का स्वागत भी,आनन्दित हो अभ्यागत भी
बस,राष्ट्र- भक्ति  हो  भारत की,आजाद  रहे शरणागत भी
कलह, कष्ट  सब  दूर   करो,  हृदय   में  प्यार  टटोलो ना
यें  भारत  है, इस  भारत  को,बस,भारत- माता बोलो ना

कौम, कबीले, मजहब में, बस,प्यार की,यार की रीत बहे
हर बोली, भांषा  आशा से, माँ  भारत  के   ही   गीत कहे
नववर्ष में आग के छन्दो से,जो गन्द मिली वो धोला ना
यें  भारत है, इस  भारत को,बस,भारत - माता बोलो ना।।
                राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
                     मो0 9897399815
          rajendrakikalam.blogspot.com

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