दरिद्र-दाँव
भीम राव ने जिनको अब तक पाला पोषा
हरिजन को इस राजनीति ने हरदम कोसा
आज दलित को पलित बनाकर पाल रहे हैं
सब राजनीति मे सत्ता ही खंगाल रहे हैं
तुम समरस का स्नान कुम्भ में करके आये
आध्यात्म जगत में भेदभाव भरसक फैलाये
अब अगडे,पिछडे ,कंहा - कंहा कितने ढूंढोगे
इस राजनीति से किन-किन को चेला मूंडोगे
अमित शाह ने हरिजन के घर रोटी खायी
इस राम भक्त ने बोट-बैंक पर नजर घुमायी
घी की चुपडी रोटी फिर भी चाट रहे हो
अब बोट बैंक से ही हरिजन को काट रहे हो
सब ने अब तक हरिजन की खेती काटी है
अगडी - पिछडी लाश सियासत ने बांटी है
क्या हरिजन की रोटी परिवर्तन लायेगी
ये सर्कस अब कब तक जनमत को भायेगी
कंही राहुल,अखिलेष,अमितशाह रोटी खायें
बोट - बैंक में सभी सियासी गोट बिछायें
अब मैं सवर्ण हूँ, मेरी तो औकात नही है
ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैष्य, वोट की जात नही है
ये कांगेस की खेती माया चाट चुकी है
हरिजन और सवर्ण बराबर बांट चुकी है
ये बंटे खेत सब चकबन्दी से एक हो गये
ऱाजनीति की नौका में अब छेक हो गये
हे, दरिद्र नारायण के जीवन रखवालों
भारत में महाभारत को फिर से ना पालो
हरिजन की रोटी खाने से क्या होता है
कवि आग ये बीज सदा नेता बोता है।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815

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