Wednesday, May 18, 2016

पर्वत में शर्बत
एक बाप ने पाला इनको, अब दूसरा ही पोशेगा
दो बाप की औलादों को क्या उत्तराखण्ड कोसेगा
ये वर्णशंकरी औलादे अब, उत्तराखण्ड में डोलेंगी
देव-भूमि की जनता, लावारिस की ही जय बोलेगी

सत्ताइस नक्षश्र, ग्रह नौ, आज अचानक एक हो गये
उत्तराखण्ड में ग्रहण लगा है, राहू, केतू नेक हो गये
सात माह में शनि की साढे साती फिर छाने वाली है
चोर - चोर मौसेरे भाई, काल सर्प छाया काली है

अब कांग्रेस के भस्मासुर भी हाथ उठाकर भागेंगे
बी.जे.पी. के राम लला भी कला दिखा कर जागेंगे
सपा, बासपा. पी. डी. पी. भी अपने नरसिंह झोंकेगी
यू. के. डी. लाचार खडी है, अब मौके पर ,भौंकेगी

16 साल की भरी जवानी आठ खसम को झेल गयी
राजनीति में नगर वधु भी खेल सियासी खेल गयी
सात माह का गिरा - गर्भ, ये उत्तराखण्ड संभालोगे
अपना बच्चा पला नही, लावारिस कितने पालाेगे

कुछ लावारिस पाले थे, वो खेल दिखा कर चले गये
उत्तराखण्ड के मस्तक पर,ये नेता कालिख मले गये
अब बाप बदलने वाले ही संभ्रान्त सियासी आयेंगे
उत्तराखण्ड की लाशों को लावारिस कब तक खायेंगे

केन्द्र समर्पित होने का हम मुर्दों में जज्बात नही
टिहरी, पौडी, और कुमैय्या, अपनी तो औकात यही
ठाकुर, पण्डित, वैश्य, शूद्र से शिखर स्वय़ं शर्माता है
देवभूमि में दानव का शदियों से समरस नाता है

मैं शमशान शवों में भी, संचार शक्ति का करता हूं
मैं कविता की अग्निशिखा से शब्द छन्द में भरता हूं
मैं भारत मां के मस्तक का ये ताज बचाना चाहता हूं
मैं कवि आग हूं,शिखरों में शोलों की कविता गाता हूं।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
मो0 9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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