नीड में भीड
मेरे देश में जनसंख्या की बगवानी फल फूल रही है
हरी-भरी धरती में सत्ता पेंग बढा कर झूल रही है
बंजर धरती की फसलों को नेता मिलकर काट रहे है
हिन्दू,मुस्लिम ,सिक्ख, इसाई अपने हिस्से बांट रहे है
सब कौमो में नश्ल बढाने की लावारिस दौड लगी है
सम्प्रदाय,मजहब में केवल बच्चों की ही होड लगी है
ये तकनीकी काम नही है बिन मेहनत के हो जाता हेै
जनगणमन अधिानायक नेता राष्ट्रगीत खुल्ला गाता है
बंग्लादेशी, नैपाली और तिब्बत को हम पाल रहे हैं
भारत मां को अगल-बगल के लावारिस खंगाल रहे हैं
मेरा भारत विश्वजगत की पञ्चायत का चौक हो गया
राजनीति में बोटबैंक तो आज सभी का शौक हो गया
दश-दश बच्चे पैदा करने की भांषा बाबा बोल रहे है
काम-वाशना, वीर्य-शोध की जडी ,बूटियां तोल रहे हैं
विद्यालय, स्कूल, मदरसे ,काम-शास्त्र की मधुशाला है
खुजराहो, कोणार्क धरोहर, पुरातत्व ह मने पाला हेै
एक साल में दो करोड की फुलवारी हम सींच रहे हैं
रहने को घर-बार नही है,सब आपस में भींच रहे हैं
भीड देखकर भारत माता बन्जर होकर सिमट रही है
सूखी धरती,भूखी धरती बिन पानी के निपट रही है
ब्रह्मचर्य की शिक्षा में भी ग्वाल,बाल फल फूल रहे हैं
जोगी,जंगम और विरक्ती,ये सब गन्ने छूल रहे हैं
अटल बिहारी,मोदी,माया,ममता, ललिता ब्रह्मचारी हैं
ये चमत्कार हे बच्चो का उद्योग देश में क्यों भारी हेै
मंहगायी,भुखमरी, गरीबी, एवरेस्ट को झांक रही है
राजनीति अहिसुष्ण हमारी ओकातों को आंक रही है
भारत माता की जय बोलो, झण्डा उंचा रहे हमारा
जनसंख्या मे विश्व विजेता, कामदेव का रूप हमारा
हम मुर्दे ग्लूकोष चढा कर मुर्दे नेता पाल रहे हेैं
डेढ अरब में खोई भारत माता को खंगाल रहे हैं
अभी समय हेै जनसंख्या के शिशू निकेतन बन्द करो
कवि आग कहता है आने वालो का प्रबन्ध करो।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
मो0 9897399815

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