Monday, May 23, 2016

विस्फोटक जनसंख्या
अगर किसी नेता मे दम हैे,जनसंख्या पर खुल कर बोलो
भारत मां को बोट-बैंक की राजनीति से अब ना तोलो
हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, इसाई, कोई तो मुर्दो में जागे
अगर देश की चिन्ता है तो स्वार्थ छोड कर आओ आगे
हिम्मत है तो प्रजातन्त्र के चौराहों में मूंह को खोलो
अगर किसी नेता में दम हैे,जनसंख्या पर खुल कर बोलो

अब हिन्दू अपनी जनसंख्या को पैमाने से नाप रहा है
मुशल मान भी गुणा-भाग से नश्ल स्वंय की माप रहा है
सिक्ख,इसाई घटी कौम को देख-देख कर कांप रहा है
ग्वाल-बाल का भारत,भारत में ही क्यो अभिशाप रहा हेै
जनसंख्या के कूडे करकट से भारत को अब ना तालो
अगर किसी नेता में दम हैे,जनसंख्या पर खुल कर बोलो

राजनीति के इन मुर्दो को विस्फोटक अनुमान नही है
ये बढती भीडें देख-देख कर ,क्या नेता को ज्ञान नही है
क्या मंहगायी,भुखमरी गरीबी का नेता को पता नही है
अहिसुष्णता फैल रही है,क्या नेता की खता नही है
जनसंख्या पर रोक लगा कर अपने कू-कर्मो को धोलो
अगर किसी नेता में दम हैे,जनसंख्या पर खुल कर बोलो

प्रजातन्त्र का बडा कबीला दुनिया हमको मान रही है
क्यों भारत माता बच्चे पैदा करके सीना तान रही है
सब जोगी,भोगी और विरक्ती इसी काम में लगे पडे हैं
डी.एन.ए. की जांच करा लो पुत्र-मोह में सभी खडे हैं
बैलोंं का गृहस्थी जीवन है, इन साण्डो के कर्म टटोलो
अगर किसी नेता में दम हैे,जनसंख्या पर खुलकर बोलो

अब केवल बच्चे पैदा करना ये जीवन का सार नही है
दीन-दुखी और रूग्ण शिशू भी राष्ट्र-भक्त संस्कार नही है
ब्रह्मचर्य का जीवन जीना इस भारत की शान रही है
जोगी, जंगम और विरक्ती भारत की पहचान रही है
उस भारत को फिर से ढूंढो, वर्ण-व्यवस्था फिर से खोलो
अगर किसी नेता मे दम हैे,जनसख्या पर खुल कर बोलो

डेढ अरब की भीड देख कर अब तो भारत शर्माता है
राष्ट्रगीत में जण-गण-मन भी भारत भाग्य विधाता हेै
सात दशक से हम मुर्दो ने क्या इस पर भी ध्यान दिया हेै
भोग-विलाशों का संस्कारो ने ही तो विषपान पिया हेै
कवि आग कहता है समरसता से सीखो, सर्प,संपोलो
अगर किसी नेता में दम हैे,जनसंख्या पर खुल कर बोलो ।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
मो0 9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

No comments:

Post a Comment