Sunday, May 15, 2016

मानव से दानव
मेरे देश में फिर से कोई ऐसा आये, मंगल कर दे
सभी सभ्यता दूर करे बस,आदिवाशी का जंगल कर दे
शिक्षा,दीक्षा,गुरूकुल की तालीमो से बदनाम हो गये
व्यभिचारी और भ्रष्टाचारी, पूरे देश में आम हो गये
पाषाण काल के आदिमानव, जानवरों सा जंगल कर दे
मेरे देश में फिर से कोई ऐसा आये, मंगल कर दे

जंगल राज्यों की परिभांषा नेता हमको समझाते है
संसद में रण कौशल देखो पशू भी इन से शर्माते हेै
बलात्कार और व्यभिचार से पशू हमेशा दूर रहा है
सतयुग,त्रेता,द्वापर,कलियुग में मानव ही क्रूर रहा है
केवल जंगली जाति,पशू हो,कुछ ऐसा ही दंगल कर दे
मेरे देश में फिर से कोई ऐसा आये, मंगल कर दे

राजनीति मे खादी कुर्ते, व्यवसायी सब भ्रष्ट हो गये
आज पूजारी,और मौलवी, साधू भी सब धृष्ट हो गये
ईशा, मूसा के चेले अब विस्फोटक ही बेच रहे हैं
आड धर्म की लेकर हिंसा की तस्वीरे खैच रहे हेैं
एक बार फिर प्रलय करके, थोडा बहुत अमंगल कर दे
मेरे देश में फिर से कोई ऐसा आये, मंगल कर दे

वाणी-भूषण, बुद्वि-बल्लभ के शव सारे शान्त पडे हों
चोर,डाकुओ के बीहड के राजनीति में लाख धडे हों
धन,बल,वैभव,अहिसुष्णता कूट-कूट कर भरी पडी हो
चौराहों पर भारत माता, दीन - हीन चुपचाप खडी हो
पूरे देश में आग लगी है, बस तू थोडी उंगल कर दे
मेरे देश में फिर से कोई ऐसा आये, मंगल कर दे

राम ,कृष्ण, महावीर, बुद्व के नामो की ही हाट लगी हेै
ईशा, मूसा और मुहम्मद की औलादें बाट लगी हेै
आतंकवाद भी पनप रहा हेै भगवानो के ही नामो से
मस्जिद में विस्फोट हो गया अल्लाह के ही पैगामो से
कवि आग बस,भील,कौल की जाति हो वो जंगल कर दे
मेरे देश में फिर से कोई ऐसा आये, मंगल कर दे।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
मो0 9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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