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हर पेपर, चेैनल मे देखो विज्ञापन है
राजनीति का लावारिस ये टुच्चापन है
जनता का ये खून - पसीना अखवारों में
प्रतिष्पर्धा भी लगी पडी हेै सरकारों में
हर पेपर में विज्ञापन की रद्दी बेचो
ये लावारिस प्रजातन्त्र है गद्दी बेचो
राजनीति की गाली भद्दी - भद्दी बेचो
षडयन्त्रो के जाल बुनो सब सद्दी बेचो
हे,राजनीति के फनकारो ये हमे बताओ
अमिताभ की जय बोलो झलसों में लाओ
प्रजातन्त्र मे भाण्ड सियासत खेल रहे हैं
हम राजनीति में वालीवुड को झेल रहे हेैं
बे - रोजगारी, मंहगाई कही नाम नही है
ये चौथा स्तम्भ देश का ,काम यही है
चैनल सब नीलाम खडे हैं, बोल रहे हैं
हर खबरों में रंग सियासी घोल रहे है
सभी सियासी देश की माया लूट रहे हैं
भारत मां की मिट्टी मिलकर कूट रहे है
भाषण से लगता है भारत स्वर्ग धाम हेै
राम,कृष्ण अल्लाहमिंया का यही गाम हेै
पर हाल कब्र का हम मुर्दे ही झेल रहे हेैं
प्रहलाद जलाकर भी हम होली खेल रहे हैं
सत्य,अहिंसा,प्रेम, शान्ती की ही बाते हेैं
बस,अहिसुष्णता आज हमारी औकाते हेै
विज्ञापन और ओछे भाषण बन्द करोगे
राजनीति मे भाण्डो का पतिबन्ध करोगे
ये महगायी, भुखमरी, गरीबी मजबूरी है
कवि आग ये सत्ता ही कातिल छूरी है।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815

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