घर के दुश्मन
मोदी ने तो सारे दुश्मन अपने घर में पाल लिये
आज विभीषण ने लंका के गुप्त भेद खंगाल लिये
अपने ही जयचन्द सियासी टांग खींचते जाते है
मनमोहन से मौन हेै मोदी सहिसुष्ण कहलाते हेै
राष्ट्र धर्म के पालन में,ये क्या विकास की भांषा है
इन सब हीरे-मोती को तुमने ही सदा तरासा है
ये कण्टक,पथ के रोडे बनकर राह तुम्हारी रोकेगे
जितना इनको शान्त करोगे, उतना ही ये भौंकेगे
तोगडिया, आदित्य, प्राची, प्रज्ञा, साक्षी घाते हेैं
आर. एस. एस., बजरंग दलों से तेरे रिस्ते नाते है
अब अहिसुष्णता फैल रही है, तेरे ही इन चेलों से
क्यों भारत माता हांप रही है रैलो और तबेलों से
हर चैनल पर प्रखर प्रवक्ता गन्द छोड कर जाते हैं
सम्प्रदाय का गीत यंहा पर बारीकी से गाते हैं
मोदी तुम तो मेहनत करके मजहब शान्त कराते हो
मतिमन्द को हर चैनल से मन की बात सुनाते हो
दीर्घ सुसासन चाहते हो तो चेलों का मुह बन्द करो
सम्प्रदाय, मजहब की भारत में ना ये दुर्गन्ध भरो
व्यक्तिगत वक्तव्य बताकर पिण्ड छुडाना चाहते हो
गंगा,यमुनी तहजीबो में सम्प्रदाय क्यों फैलाते हो
अटल बिहारी ने भी ये सब कण्टक, संकट झेले थे
छत्तीस दल के साथ-साथ वो सम्प्रदाय से खेले थे
अपनो के कू - कर्मे से सत्ता का साथ गंवाया था
पहली बार सियासत में आदर्श सियासी आया था
इन चेलो को शान्त करो और मंहगायी पर गौर करो
बे-रोजगारी और गरीबी को ही अब सिरमौर करो
इन चेलों के कारण तेरी छवि बिगडती जाती है
कवि आग की कविता तेरी परणीती बतलाती है।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
मो0 9897399815

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