शहीदों की तौहीन
कभी वतन की शान थे आज क्योँ अहसान हैं
दो चार की गिनती यंहा मजबूर हैं बेजान हैं
राष्ट्र के गौरव किसी को क्यों समझ आते नही?
कुछ बात है नई नश्ल को रणबांकुरे भाते नंही
षडयन्त्र की ये राजनीति क्यों वतन से दूर है?
पाश्चात्य की परछायी हर दिल में भरी भरपूर है
आदमी औलाद को को अंग्रेजियत समझा रहा है
किस तरह से राष्ट्र नेता राष्ट्र को ही खा रहा है?
अब राष्ट्र के बलिदानियों की याद भी फरियाद है
रणबांकुरों के नाम से क्यों हो रही जेहाद है
सम्प्रदायी जंग में संस्कार अपने खो गये है
राष्ट्र के जो पूत थे कैसे मजहब के हो गये हैं ?
प्रतन्त्र थे जब इस जमीं पर ना कबीला कौम था
आधार था धरती बिछौना सर पे साया व्योम था
आज हम आजाद हैं पर ना जमी आकाश है
अब हे, तिरंगे राजनीति पर तेरी क्यों आश है
हम मर गये, गुमनाम हैं,क्यों आज अपने देश में
अब याद भी आते नही हम इस सियासी भेष में
हम नही चाहते हैं गौरव,मृत शवों की शान का
अब प्रश्न उठता है यंहा,इस देश की पहचान का
अब राष्ट्र के मरघट पे तस्वीरें बिछाना छोड दो
अब हमारी याद में झण्डा झुकाना छोड़ दो
स्वाभिमान तो बस, शोभता है सरहदों के वीर पर
मैं लिख रहा हूॅं गीत भारत मां तेरी तकदीर पर ।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
मो09897399815
rajendrakikalam.blogspot.com
कभी वतन की शान थे आज क्योँ अहसान हैं
दो चार की गिनती यंहा मजबूर हैं बेजान हैं
राष्ट्र के गौरव किसी को क्यों समझ आते नही?
कुछ बात है नई नश्ल को रणबांकुरे भाते नंही
षडयन्त्र की ये राजनीति क्यों वतन से दूर है?
पाश्चात्य की परछायी हर दिल में भरी भरपूर है
आदमी औलाद को को अंग्रेजियत समझा रहा है
किस तरह से राष्ट्र नेता राष्ट्र को ही खा रहा है?
अब राष्ट्र के बलिदानियों की याद भी फरियाद है
रणबांकुरों के नाम से क्यों हो रही जेहाद है
सम्प्रदायी जंग में संस्कार अपने खो गये है
राष्ट्र के जो पूत थे कैसे मजहब के हो गये हैं ?
प्रतन्त्र थे जब इस जमीं पर ना कबीला कौम था
आधार था धरती बिछौना सर पे साया व्योम था
आज हम आजाद हैं पर ना जमी आकाश है
अब हे, तिरंगे राजनीति पर तेरी क्यों आश है
हम मर गये, गुमनाम हैं,क्यों आज अपने देश में
अब याद भी आते नही हम इस सियासी भेष में
हम नही चाहते हैं गौरव,मृत शवों की शान का
अब प्रश्न उठता है यंहा,इस देश की पहचान का
अब राष्ट्र के मरघट पे तस्वीरें बिछाना छोड दो
अब हमारी याद में झण्डा झुकाना छोड़ दो
स्वाभिमान तो बस, शोभता है सरहदों के वीर पर
मैं लिख रहा हूॅं गीत भारत मां तेरी तकदीर पर ।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
मो09897399815
rajendrakikalam.blogspot.com
No comments:
Post a Comment