Monday, April 20, 2015


                धरती का मालिक-सत्ता की कलिख              
हमको किसान से क्या लेना,तुमको किसान से क्या लेना
ये  बोट  बैंक  है  भारत  का,  मजबूरी   है  इनको  सहना
चन्दा - धन्धा  हम सबको भी उद्योग-पति  से   मिलता हेै
सत्ता  के  फटे  लिबासों   को  धनवान  हमेशा   सिलता हैे
ये  लावारिस   पतनाले  हैं, इनको   तो  हरदम  है  बहना
हमें  किसान  से  क्या लेना,तुमको किसान से क्या लेना

तुम भी कन्धे  पर  हल  रख लो, हम भी कन्धे पर ढोयेंगे
हम  विरह - वेदना  के  आंशू  संसद  में  मिल  कर रोयेंगे
इस पागल  जनता को  समझो ,इनको  कैसे  समझाना हेै
सत्ता  के   भोगी   हम  सब  हेैं , रोना  तो   एक  बहाना हैे
ये  भीड- तन्त्र  है भारत  का   अन्धो  के  आगे क्यो रोना
हमें किसान  से  क्या लेना, तुमको  किसान से क्या लेना

बे - भाव  के बादल  बरस रहे,हम इनको  रोक नही सकते
माहौल  बना  है  शोकाकुल, इसमें  भी  भौंक  नही सकते
ये  खेत  किसानी, मजदूरी, अब  सब  बेकार  की  बाते हैं
साठ   साल   तुमने   खाया,  मौका  है  हम  भी  खाते हैं
ये लोक-तन्त्र का बोट-बैंक , खण्डहर  में  दबा  वो सोना है
हमें   किसान  से  क्या लेना,तुमको किसान से क्या लेना

भूमि  का अधिग्रहण कर लो, गाँवो को सभी  वरण करलो
हम तो सब सत्ता भोगी हैं कुछ चरण, शरण  इनकी धरलो
उद्याोग - पति  से  हम  सब   की   इच्छाएं  पूरी   होती हेैे
ये  नंगे - भूखे  धरती  के  मालिक  को  सियासत ढोती हेै
जय - जवान और जय - किसान ,ये दो  ही  हैं अपने नैना
हमें  किसान  से  क्या  लेना,तुमको किसान से क्या लेना

अब  अगर  नही  गेंहू   घर  में  तो  बाहर  से  मँगवा लेंगे
नही   जलेगा   चुल्हा  तो  लंच - पैकेट हम  घर- घर  देगे
सब  देश  खडे   तैयारी  में ,भारत  में  आश  लगा  करके
अब  वही  करेंगे  खर्चा  सब, आराम   करेंगे   हम  घर के
इस डेढ  अरब की  भीडों का  मुश्किल  है बोझा  अब ढोना
हमें  किसान  से क्या  लेना, तुमको किसान से क्या लेना

हम  सब  सर्कस  के  बाजीगर, अपनी  ही सर्कस खेल रहे
हम  रावण,कंस,दुशासन  हेै,ये  जनमत  हमको  झेल रहे
इन  सुन्दर-सुन्दर  शब्दो से  हम ,कब से  भारत पाल रहे
हम  भीड जुटाकर  मुर्दों   की  ग्लूकोष  उदर   में  डाल रहे
कवि  आग  के  शब्दो  में, अब ये  अन्धकार  की  हेै  रैेना
हमें  किसान  से क्या लेना,तुमको  किसान  से क्या लेना।।
                  राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
                       मो09897399815
            rajendrakikalam.blogspot.com

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