Friday, April 10, 2015

       बीस वर्ष पूर्व लिखी गयी इस रचना को पढ कर शायद आपकी आँखों में आँशू आ जायें।      

                    गाॅधी,नेहरू,सूभाष
रात को गाॅधी , नेहरू, सूभाष  सपने  में आये
ये  भी  चमत्कार  था   तीनो  एक  साथ पाये
तीनो  का  प्रकाशित  दिव्य   चेहरा  अनूप था
क्रान्ति,भ्रान्ति,और शान्ति  का  कैसा रूप था

मैने पहले अहिंसा के पूजारी बापू के पैर पकडे़
अर्धनग्न  गाॅधी   ने  देखा  ,तो   थोडा  अकडे़
बोले  बेटा  तू  क्यों  अपनी   जवानी  खोता हेै
मेरे चरणो पर तो केवल गाॅधी वादी ही होता है

नेता बनना है तो साथ में खडा  होना  काफी है
भ्रष्टाचार   की   तो    हिन्दुस्तान   में माफी है
2अक्टूॅबर को राजघाट में  मेरा  चरखा चलाना
हर  चौराहों  पर  मेरे   दो - चार  भजन  गाना

देश  विदेश  के  मीडिया   से  तू  घिर  जायेगा
तेरे जेैसा घनचक्कर  मेरे चरखे से तर जायेगा
मेरे  चेले  तो  आज  भी हिन्दुस्तान में भारी हैं
खादी   के   नीचे   एेतिहासिक   खेल   जारी है

मेरा  स्टाईल  था   मैं जीवन   भर  नंगा  घूमा
युवक , युवतियों   को   जॅहा   भी   देखा  चूमा
मैं तो विश्व  को अपना  ही  आश्रम  मानता था
जीवन रोमांटिक होना  चाहिये  यही जानता था

बापू के  बाद  मैने  चाचा  के  चरणो को दबाया
नेहरू  उछल  पडे,  ये  जिन्ना  कहाॅ  से  आया
मैं बोला चाचा भारत पाक का  बॅटवारा हो गया
नाम   गाॅधी   का  और  देश  तुम्हारा  हो गया

मेरी बात  सुनकर  चाचा नेहरू  थोडा सा अकडे़
एक बार पुनःझुककर परंपिता बापू के पैर पकडे़
बोले  बापू  मेरा  नाम तुम्हारा काम चल रहा हेै
हमारे  नाम  से  ही  तो हिन्दुस्तान पल  रहा हेै

नेहरू  की  बात  सुन कर सूभाष बाबू चिढ़ गये
लाल,पीली  आॅंख   किये   दोनो   से  भिड़ गये
तुम्हारी महत्वाकाँछा से देश खण्डों में खो गया
नेहरू भारत का,जिन्ना पाकिस्तान का हो गया

मैं  तो  पूरे  विश्व  को  हिन्दुस्तान बना  रहा था
सब मान गये बस तुमको  रास नही आ रहा था
तुम्हारी अहिंसा से तो ये देश कभी का मर गया
राजनीति में  चापलूसी का  जहर  पूरा भर गया

मेरी  मानते तो हम1947 से पहले आजाद होते
ये पाकिस्तान  और  बंगला  देश हम क्यों खोते
आपने तो आर्यखण्ड की मल्कियत ही लुटवा दी
दुनियां में हिन्दुस्तान की हैसियत  ही  पिटवादी

घर लुटवाकर आज आजादी  का   गाना गाते हो
बर्बाद मैं मेरे साथी हुये  दुनियां को तुम भाते हो
मेरे  साथी  इस  आजादी के लिये फाॅंसी चढ़ गये
तुम्हारे  चेले,चिमटे  सियासत के पीछे  पड़ गये

नोटों में  तुम्हारा फोटो होना  भी तो  एक चाल है
देख  लो   भारत  माॅं  के लाल  का  क्या  हाल है
अमर  कैसे   हों  आपने   हर  तरीका   अपनाया
लेकिन  देश  को  तुम  नही क्रान्तिकारी ही भाया

हमारी लडाई तो  वतन की आजादी की लडाई थी
देश बंटवारे  की  बात बीच में  कहाॅ  से आयी थी
तुम्हारे  चेलो  में  तो  केवल सत्ता का ही सुख था
क्रान्ति  कारियो को  हमेशा इसी बात का दुख था

आप ही ने तो  हिन्दू, मुस्लिम  का नारा दिया था
मैंने तो  उस वक्त  भी  खून का  ही  घूँट पिया था
तुम्हारे  इस  नारे  से  वतन के तीन टुकडे़ हो गये
तुम्हारे सारे चेले सत्ता  की  अय्यासी  मे  खो गये

छोटे-छोटे   खण्डो   में  हिन्दुस्तान   खो  जायेगा
कौन सा  कबीला  औेर  कौम   राष्ट्र -गीत गायेगा
लेकिन तुम्हारी क्षणिक आकाँछाये  पूरी हो रही हैं
मैं भविष्य  देखता हॅॅू , भारत की जनता रो रही है

तुम्हारे लोगो ने हमेशा  मौके  का  फायदा उठाया
अंग्रेजों को गाॅंधी, नेहरू  औेर  जिन्ना  क्यों भाया
अंग्रेज  तो  मेरी  दहसत  से पहले ही डर गया था
आजादी  के  बीस   साल  पहले  ही  मर गया था

आजादी   का   मोहरा   किसी   को तो बनाना था
अखण्ड  भारत  को  हिन्दुस्तान  तो  दिखाना था
ये  कैसा  सोैदा  था अंग्रजो  के चक्कर में आ गये
लडाई   का   फायदा   पाक  और बंगला उठा गये

आजादी   का  दिन   तो 3  जून  1958 लिखा था
10माह पहले आजाद होना मुझे  षडयंत्र दिखा था
अफरा-तफरी की आजादी मुझे  हमेशा खलती थी
मैं मजबूर था क्यों कि हूकूमत आपकी चलती थी

आपको  समझाओ  तो आप अनसन पर बैठते थे
तुम्हारे  चेले  तो  बश , तुम्हारी  आड़ में  ऐंठते थे
वो कभी नही चाहते थे कि  तुम्हारा  मेरा संवाद हो
नेहरू का वंश  ही  बस , इस  देश   में  अपवाद हो

मेरी  मौत  के  तो  हमेशा  फरमान   जारी होते थे
आप   दोनो  हमेशा  चैन   की   नींद  ही   सोते थे
मेरी लाश के सौदे पर ही  तो  देश  आजाद  होता है
देश गुमराह हो  गया,  जो   तुम   जैसों को ढोता है

आप तो  हमेशा अपने  चेलों  की ही बात मानते थे
हम विरोधी  थे जो, आपकी  असिलियत जानते थे
तुम्हारे  चेले  तो  हमें  आतंकवादी  तक  कहते थे
राष्ट्र -भक्ति  के  कारण   हम  भी  चुपचाप सहते थे

क्रान्ती की  बुनियाद पर  ही  तो  आजादी टिकी थी
आप लोगो को  हमेशा  हमारी   मौत  ही दिखी थी
मुझे मारने के तो हमेशा  गोपनीय  षडयत्र होते थे
आप  तो  हमेशा  ही  मेरे   रास्ते में  काॅटे  बोते थे

देश टूटा, तुम  इन  खण्डो  को  आजादी मानते हो
भीख  में मिले   इन   टुकडों  से  सीना  तानते हो
मेरी आजादहिन्दफौजआज भी  शेरो  की जमात है
महाभारत  को पढो ,अंहिसा   की  क्या  औकात है

अंग्रेजो  की  क्या  औकात   थी   हमसे  लडने की
आपकी  आदत  थी  हर  जगह  बीच  में अडने की
तुम लोगो के कारण ही तो मैआज  वतन से दूर हूॅं
ये हिन्दुस्तान तो मेरा भी घर है लेकिन मजबूर हूँ

बापू,क्रान्तिकारी समझौता नही  करते टूट जाते हैं
मरने  के  बाद भी  उनके  स्वाभिमान छूट जाते हैं
वतन  हमेशा  क्रान्ति-कारियों  को   याद  करता है
समझौते  में जीने  वाला ,वतन  में  रोज मरता हैे

आजादी  का  दीवाना  कभी  मुआवजे  पर जीता है
राष्ट्र - भक्त   क्या   कभी   राष्ट्र   का  खून  पीता हेै
स्वाभिमानी कभी  भी  मौके  फायदा  नही उठाता
क्रान्तीकारी  शेर  होता  है  कभी   घास नही खाता

मेरे  साथी  तो  आज  भी  जिन्दे हेैं पर  मजबूर हैं
लाचारी  से  कभी  डरते  नही  हैं   आज  भी शूर हैें
राष्ट्र का खून हमेशा वतन को  उॅचायी  पर धरता हेेै
क्या  सूभाष,चद्रशेखर,भगत  सिंह  कभी मरता है

सूभाष की क्रान्ति  को  देख मेरे  नेत्र गीले हो गये
पास  बेठे  गाॅधी  और  नेहरू शर्म  से पीले हो गये
स्वार्थ मे बडा आदमी हमेशा बडी  गलती करता है
एेसी  राजनीति  से  तो  हमेशा  राष्ट्र  ही  मरता है।।
             राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
                      9897399815
        rajendrakikalam.blogspot.com

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