हकीकत
सियासत ने हमारी कौम को मुर्दा बना डाला
सिर खोकर जवानो का किया क्यों अपना मूॅंह काला
ये मुर्दे हैं मेरे घर के जिन्हे हमने सदा पाला
मेरे घर को मेरे घर के दरिन्दो ने, ही खंगाला
यहाॅं तो ,मौेत के मंजर को मुर्दे रोज ढोते हैं
सियासत के शवों से क्यो सदा इतिहास खोते हैं
हमें गीता बताती है , कि कैसे पेश आना है
अब तो लाश को ढोना तिरंगे का फसाना है
क्यों पाकिस्तान का खण्डहर मेरी बुनियाद ढोती है
इन कब्रिस्तान के मुर्दो से ,क्यों जेहाद होती हेै
कंही तो हल छिपा होगा इन्हे जड़ से हटाने का
अजब कैसा तरीका है सियासत को बचाने का
यंहा तो एक ही रोना है बस, बातें ही चलती हेै
हूकूमत जब बदलती है,तो ये हरकत मचलती है
हम भी गीत लिखते हैं ,मिटा दो उनकी हस्ती को
कलम कर दो हूकूमत से इस फिरकापरस्ती को
इन्हे सुविधा दिलाने की शियासत बात करती है
अब ये कैसी राजनीति है ,जो सबको अखरती है
कुचलते है सभी आर्दश हमारे कारनामो से
यहाॅं आतक झडते है , नेता के पजामो से
नंगो और मतंगो के ये पंगे हम ही सहते हैं
ये घुस-पैठ करके भी मेरे घर में ही रहते हैं
गरीबी और मंहगायी , का ये भी एक कारण है
पाकिस्तान का आतंक , दुनिया में उदाहरण है
ये पाकिस्तान का दरिया मेरे घर में क्यों बहता है
फितरत है मेरे घर की,जो हरकत रोज सहता है
अगर हम भी करे पंगा, तू नक्शे में ना रह पाये
सरहद पर अगर मूतें तो पाकिस्तान बह जाये
सपोलों के कपोलों मे कितना दूध डालोगे
इन आतंक की नश्लों को कितना और पालोगे
उठाओ अस्त्र अपने अब जहाॅ आतंक दिखता है
नेता को कुचल डालो जो इनका भाग्य लिखता है
हूकूमत का भरोशा छोड़ कर तैयार होना है
तिरंंगे को, सियासत की फिजां से अब ना ढोना है
उठाओ अस्त्र अपने अब ,बस, घुसते चले जाओ
वतन का एक ही फतवा हेै,बस,तुम आग बनजाओ
मुटठी भर दरिन्दो का क्यो इतिहास गाते हो
महाभारत को पढकर भी इतना खोंप खाते हो
यहाॅ संहार करने को खुद अवतार आता है
ये हिंसा भी अहिंसा है ये मुरलीधर बताता है।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com
सियासत ने हमारी कौम को मुर्दा बना डाला
सिर खोकर जवानो का किया क्यों अपना मूॅंह काला
ये मुर्दे हैं मेरे घर के जिन्हे हमने सदा पाला
मेरे घर को मेरे घर के दरिन्दो ने, ही खंगाला
यहाॅं तो ,मौेत के मंजर को मुर्दे रोज ढोते हैं
सियासत के शवों से क्यो सदा इतिहास खोते हैं
हमें गीता बताती है , कि कैसे पेश आना है
अब तो लाश को ढोना तिरंगे का फसाना है
क्यों पाकिस्तान का खण्डहर मेरी बुनियाद ढोती है
इन कब्रिस्तान के मुर्दो से ,क्यों जेहाद होती हेै
कंही तो हल छिपा होगा इन्हे जड़ से हटाने का
अजब कैसा तरीका है सियासत को बचाने का
यंहा तो एक ही रोना है बस, बातें ही चलती हेै
हूकूमत जब बदलती है,तो ये हरकत मचलती है
हम भी गीत लिखते हैं ,मिटा दो उनकी हस्ती को
कलम कर दो हूकूमत से इस फिरकापरस्ती को
इन्हे सुविधा दिलाने की शियासत बात करती है
अब ये कैसी राजनीति है ,जो सबको अखरती है
कुचलते है सभी आर्दश हमारे कारनामो से
यहाॅं आतक झडते है , नेता के पजामो से
नंगो और मतंगो के ये पंगे हम ही सहते हैं
ये घुस-पैठ करके भी मेरे घर में ही रहते हैं
गरीबी और मंहगायी , का ये भी एक कारण है
पाकिस्तान का आतंक , दुनिया में उदाहरण है
ये पाकिस्तान का दरिया मेरे घर में क्यों बहता है
फितरत है मेरे घर की,जो हरकत रोज सहता है
अगर हम भी करे पंगा, तू नक्शे में ना रह पाये
सरहद पर अगर मूतें तो पाकिस्तान बह जाये
सपोलों के कपोलों मे कितना दूध डालोगे
इन आतंक की नश्लों को कितना और पालोगे
उठाओ अस्त्र अपने अब जहाॅ आतंक दिखता है
नेता को कुचल डालो जो इनका भाग्य लिखता है
हूकूमत का भरोशा छोड़ कर तैयार होना है
तिरंंगे को, सियासत की फिजां से अब ना ढोना है
उठाओ अस्त्र अपने अब ,बस, घुसते चले जाओ
वतन का एक ही फतवा हेै,बस,तुम आग बनजाओ
मुटठी भर दरिन्दो का क्यो इतिहास गाते हो
महाभारत को पढकर भी इतना खोंप खाते हो
यहाॅ संहार करने को खुद अवतार आता है
ये हिंसा भी अहिंसा है ये मुरलीधर बताता है।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

No comments:
Post a Comment