Saturday, April 18, 2015

            चित्र काशमीर समझौते का है        

                   उपहास का इतिहास
तुम्हे  जब  भीख  में  हमने  ये  पाकिस्तान दे डाला
तुम्हारे बाप जिन्ना ने किया  था  अपना  मूँह काला
हरि  सिंह  के  गुनाहो  से  इस   काशमीर  को टाला
ये  ऐसा  पाप   है   जिसको    नेहरू  ने  सदा पाला

ना   नेहरू   ने कभी चाहा,ना गाँधी  ही समझ पाया
कौशिश  की  थी बल्लभ ने,किसी को रास ना आया
अगर  थोडी  सी  समझदारी  ये  बूढे  होश  मे करते
ना पाकिस्तान  के  मरते, ना  हिन्दुस्तान  के मरते

बशीयत ऐसी  लिख डाली जो हमको  भी अखरती है
उसी  गफलत में लावारिस ,अब  काशमीर  धरती है
सभी   सुविधा   हमारी   हेै,   हूकूमत  भी  हमारी है
मेरे  घर  का  ही  खा  करके   सियासी  जंग जारी हेै

अगर  सुविधा  हटादो  तो  ये  कब्रिस्तान  बन जाये
पल  भर  में ये जन्नत  भी जहन्नुम में समा जाये
हमें क्या  लाभ  है  इनसे ,जो अब तक पालते आये
पलते  हैं  मेरे  घर  में , और कव्वाली पाक की गाएं

कंही  जिन्ना ,कंही  जिया,  मुर्सरफ  अब  नवाजी है
ये  कैसा  बीज है  इनका,जो  दुनिया भर मे पाजी है
ना  खाना  है ,ना   दाना  है  बस,  विस्फोट  खाते हैं
इनके  सब   संपोले   भी  गजल   खूनी  ही  गाते हैं

अमरीका  से कुछ  समझो  जो  ओसामा मिटा डाला
हिम्मत  हो  तो   ऐसी  हो  जो  पाकिस्तान खंगाला
मेरेे  घर  के  संपोलों  को  पनाह   क्यों  पाक देता है
दाउद  की   दहशत   को, क्यों  हिन्दुस्तान  सहता हेै

फौेजों को खुला छोडो, जो  चुन - चुन  कर  इन्हे मारे
इन  अलगाव  और  आतंक   की   नश्लों   को  संहारे
सियासत मौन  हो जाये, मेरी  फौजों  में दम खम है
मेरी  इस  आग  में  पानी  पडा, मुझको  यही गम है।।
             राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
                    9897399815
         rajendrakikalam.blogspot.com

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