कश्मीर की तस्वीर
तुम्हें लडना नही आता तो क्यों बैठे सियासत में
तुम्हें अडना नही आता तो क्यों फंसते हो आफत में
तुम्हारी लालसाओं से, वतन में जंग होती हेेै
सियासत से शक्ल भारत की क्यों बदरंग होती हेै
क्या जरूरत थी कश्मीरी सियासत को सँवरने की
क्या जरूरत थी मुफ्ती से सियासी बात करने की
क्या जरूसत थी चौपड के पासों को पलटने की
क्या जरूरत थी पागल से गले मिलकर लिपटने की
सियासत में जिसे देखा वही मादा निकलता है
जिन्हे हम भीख देते हैें , वही दादा निकलता हेै
सभी की देन दारी का तकादा ही निकलता है
नेता से तो भारत का लवादा ही निकलता है
ये मुर्दे भी अलग होने की हरदम बात करते हैं
अब कब्रिस्तान के मुर्दे गढे आघात करते हैं
ये गलती से उगी फसलें कितनी और काटेंगे
भारत को ये लावारिस अब कितना और चाटेंगे
इनका एक ही हल है ,बस खदेडो पाक में इनको
जो ज्यादा करे हल्ला तो रक्खो ताक में इनको
ये वो सांप हैे जो दूध पीकर जहर उगलते हेैं
ये भी हम नही कहते, पूरी दुनिया को खलते हैं
अभी तो दो चार पागल हैं इनका हल जरूरी है
इन्हे जड से मिटाने की भी ये हलचल जरूरी हैे
हिम्मत से करो निर्णय इन्हे जड से हटाने का
बरसती आग कहती है, ये मौका हेै जलाने का।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com
तुम्हें लडना नही आता तो क्यों बैठे सियासत में
तुम्हें अडना नही आता तो क्यों फंसते हो आफत में
तुम्हारी लालसाओं से, वतन में जंग होती हेेै
सियासत से शक्ल भारत की क्यों बदरंग होती हेै
क्या जरूरत थी कश्मीरी सियासत को सँवरने की
क्या जरूरत थी मुफ्ती से सियासी बात करने की
क्या जरूसत थी चौपड के पासों को पलटने की
क्या जरूरत थी पागल से गले मिलकर लिपटने की
सियासत में जिसे देखा वही मादा निकलता है
जिन्हे हम भीख देते हैें , वही दादा निकलता हेै
सभी की देन दारी का तकादा ही निकलता है
नेता से तो भारत का लवादा ही निकलता है
ये मुर्दे भी अलग होने की हरदम बात करते हैं
अब कब्रिस्तान के मुर्दे गढे आघात करते हैं
ये गलती से उगी फसलें कितनी और काटेंगे
भारत को ये लावारिस अब कितना और चाटेंगे
इनका एक ही हल है ,बस खदेडो पाक में इनको
जो ज्यादा करे हल्ला तो रक्खो ताक में इनको
ये वो सांप हैे जो दूध पीकर जहर उगलते हेैं
ये भी हम नही कहते, पूरी दुनिया को खलते हैं
अभी तो दो चार पागल हैं इनका हल जरूरी है
इन्हे जड से मिटाने की भी ये हलचल जरूरी हैे
हिम्मत से करो निर्णय इन्हे जड से हटाने का
बरसती आग कहती है, ये मौका हेै जलाने का।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815
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