Wednesday, April 8, 2015

                     एक कवि की सलाह
एक  जमीं   है  जंहा  एक  है  दोनों   का  आकाश एक है
टूटे दिल के  दो  टुकडों  में,आव  भाव  और आस एक है
जतन एक  है कथन  एक  है,राजनीति का पतन एक है
धर्म मजहब  की  दोनों कौमें,भटक  गयीं हैंवतन एक है

कोइ  आकर   मुझे  बतादो  इस  धरती  में  कहाॅं हद है
छाती से छाती मिलती हैं  दीन  इमान  का कैसा कद है
दरियादिली, समन्दर का, समरथ  पथ पर कैसा मद है
आन,बान और शान एक हैे, फिर  परमादी  कैसा पद है

सत्ता और सिायासत की समसीर ने हमको  काट दिया
राजनीति की जिल्लत किल्लत ने ही हमको बाॅंट दिया
अमन - चैन के  चुल्हों  से,  चिनगारी  को  भडकाया है
सत्ता  और  सियासत  ने  शदियों  से हमको   खाया है

गीता और  कुरान  की  भांषा,मानवता को जोड  रही है
ना समझी की अभिव्यक्ति है हिन्दू,मुश्लिम मोड रही है
असमंजस में फंसी कौम है धर्म मजहब को छोडरही है
द्वन्द - गन्द  आतंकी  भाषा, दोनो  के  घर तोड़ रही है

क्यों रोज  मर  रही  दोनो  कौमे  आतंकी  विस्फोटों से
अब प्रजातन्त्र  भी खेल रहा  है देख  सियासी  बोटों से
मिल जाती है पनाह यहाॅं पर  हिजबुल को ओसामा को
दोनों   कौमें   खप्पर  लेकर   देख   रही  ओबामा  को

पाल  रहे  थे  ओसामा,  इस्लाम मुकम्मल  करने को
छिपे पडे़ हेैं आतंकी  क्यों  लावारिस ही जैसे  मरने को
क्या  दिखलाना  चाहते  हो  तुम झूठे अमली जामो से
क्यों र्निदोषों   को   मार  रहे  हो अल्ला  के  पैगामों से

तरस  रहीं  हैं,दोनों कौमें टूटा दिल  फिर से मिल जाये
फटे लिबासों  की  जन्नत कोई फरिस्ता तो सिल जाये
मजहब की झूठी बुनियादें,मिले प्रेम तो खुद हिल जाये
नवअंकुर  सी दोनों  कौमों के हृदय के ,गुल खिल जांये

किस  मुंह  से  काशमीर  को अपना हिस्सा मान रहे हो
असल तुम्हे  भी  मालूम  है, फिर भी सीना तान रहे हो
तेरे  कुत्ते   पागल  होकर  सरहद  पर  क्यो  भौंक रहे हैं
आंगन  मेरा,  दाल  सियासी   पाकिस्तानी  छोंक रहे हैं

अब अमरीका के  अस्त्र  तूझे, निर्वस्त्र  बना  कर छोडेंगे
रोटी  को मोहताज  करेंगे, बस  त्रस्त बना  कर  छोडेंगे
तेरे भाग्य  में  मौत लिखी  है, सारी दुनिया जान गयी
आतंकवाद  के  उद्योगों  का  तस्कर  तुझको मान गयी

छोड के सीमा के सब पंगे, आत्म सर्मपण खुद  कर दो
हम से जो कुछ भी पाया है,भारत माँ  पर अर्पण कर दो
नही  तो  भैया  जड मूल  से  मिटने को तैयार रहो तुम
हमने तो  ये ठान लिया है,चाहे कितना  प्यार कहो तुम

अलगाव  वाद  की बातें करने वाला  ना  अरमान रहेगा
अगर  पास  में  रहना  है तो तू भी   हिन्दुस्तान कहेगा
लाहौर, करांची,रावलपिण्डी,ये  भारत  का  ही हिस्सा है
भीख माँग  कर  खाने  वाले  बता, तेरा  क्या किस्सा है

सरिता ,सागर ,जंगल ,मंगल, डंडा , झंडा  एक बनाओ
आशा,भांषा, भाव,  भंगिमा, एक  राष्ट्र  का गाना  गाओ
कौम एक हो,व्योम एक  हो  जहर  जहन का दूर हटाओ
जम्बूद्वीप पुनःविकसित  हो  भारत  माता के बन जाओ!!
            राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
                       9897399815
         rajendrakikalam.blogspot.com

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