Wednesday, April 1, 2015

                  क्या चाहते हो
हमें   नेता  बनादो  तुम   हम   वो  कर   दिखायेगें
वतन  की  आबरू  पर   भी  मिटेगे  मर  दिखायेगें
झाडू   ही   लगाना  है  तो   सरहद   पर   लगायेगें
सुषमा  ने  कहा  था  हम  दश  नर  - मुण्ड लायेगें

अब तुम  चूडियाँ  पहनो हूकूमत  छोड  दो  हम पर
भरोसा करके देखो तो,इस किन्नर के दम-खम पर
ना  आगे  है  ना पीछे  है, वतन  को  हम  बचायेगें
बस, तिरंगा  हाथ  में  दे  दो, कंराची  में  फहरायेगें

इस पाकिस्तान  की हरकत से,कितने घर उजाडोगे
सियासत की सडक पर,अब कंहा तक तुम दहाडोगे
भरोसा  खो  चुकी जनता, अब खादी  के  नमूनो से
क्यों  सरहद  लाल  होती  है  इन फौजो के खूनो से

तुम्हें  अब  है  कंहा फुरसत,भारत माँ की छाती की
नेता  को तो  चिन्ता  हेेै, वतन  में और ख्याति की
वजीरों   का  तो  चौराहों  में  चिल्लाना  अखरता हैेे
सरहद  का  सिपाही  क्यों ,यंहा बे - मौत  मरता है

इधर  बंग्ला, उधर  चीनी  भी, हमला  रोज करते हैं
सियासी   कारनामे   तो,  अब   सबको  अखरते हैं
क्या  ये  नैपाल  मण्डी  है, खुले  बाजार   में  घूमों
क्या  खाला  का  घर  है ये, जंहा  चाहो  वंहा  झूमो

हम  नाचेगें   भी  गायेगें  भी, भारत  को  बचायेगें
अगर मौेका मिलेगा हम को तो पाकिस्तान जायेगें
जूते   चार   मारेगें,  उन   शरीफो   के  नवाजों को
कुचल  कर आयेगें उनके तवायफ तख्त,ताजों को

अब  तुम्हारी  कूटनीति  से  यंहा आवाम  मरता हेै
तुम्हारा  ये  तरीका  भी   यंहा  सबको  अखरता है
तुम्हारी  बात  सुन करके,यंहा कुछ आस जागी थी
ये  इतिहास  कहता  है  कि ,ये सत्ता ही अभागी थी

हम किन्नर हिन्दू  हैें, ना मुस्लिम हेैं सियासत में
हमें तो  नाच, गाना ही  मिला  हैे  इस विरासत में
वतन  की  रोटियां   खाकर  हम  जीवन  चलाते हेैं
हम  ना  मर्द  होकर  भी , वतन  के  गीत  गाते है

हमें  बस  एक  मौका  दो  कुछ  करके  दिखाने का
हमें  बस  एक  मौका   दो,  माँ  का   दर्द  गाने का
हम   फौजों   साये   में,  वो   कुछ   कर  दिखायेगें
जो  तुम  में  बुझी  है आग  हम ,फिर  से लगायेगे।।
                राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
                        मो09897399815
            rajendrakikalam.blogspot.com

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