Thursday, April 16, 2015

                    जम्बू में तम्बू
भिखारी पाक  के साये  में कितना और खेलोगे
हे कब्रिस्तान के मुर्दों, तुम कितना और फैलोगे
पाकिस्तान में  जाओ,जिन्हे तुम बाप कहते हो
ये कश्मीर  मेरा  है ,मेरे  घर  में  क्यों रहते हो

लानत है मेरे घर का ये  खाकर ही  तो पलते हैं
मेरे  घर  के  दिये से आसियाने रोज  जलते हैं
ये दहशत दिखाकर के  क्या  परिणाम चाहते हैं
यहाॅं आतंक मजहब  की  सुरक्षा से  ही आते हैं

हर मुजरिम की करते हैं हम दामाद सी खातिर
तभी  तो राजनीति  मे!  दरिेन्दे  हैं यहाॅं शातिर
जेलों  म पनाह  मिलती है हर आतंकवादी  को
मुजरिम के  लिबासो मे तडफती,देख खादी को

यहाॅं फाॅंसी भी रूकती  है हूकूमत की अपीलो से
लफंगे  बच  निकलते है यंहाॅं मंहगे  वकीलों से
कुचलते  है   सभी  आर्दश हमारे  कारनामो  से
यहाॅं  आतंक   झडते   है ,नेता  के  पजामो  से

यहाॅं  हर  तर्क  में कूतर्क, ये  चैनल  दिखाता हैैै
बे-सिर  पैर की  बाते, यहाॅं  हर  शख्स  गाता है
इन्हें सुविधा दिलाने की शियासत बात करती है
ये  कैसी  राजनीति  है  जो  सबको  अखरती है

सुनो दिल्ली, सुनो मुम्बई हम से रोज कहता है
यहाॅं तो न्याय के मन्दिर में भी आतंक रहता है
यहाॅं हर शख्स विस्फोटों के साये  में ही जीता है
आलम है सभी घर का निकलना भी फजीता हेै

मुटठी  भर  मुगल आये ये  इतिहास  गाता  है
यहाॅं  सस्कार अंगेजी, सभी कौमो को  भाता है
यहाॅं  दुश्मन   नहीं   कोई ,अपने  ही  बनाते हैं
मेरे घर में  ही रहकर के  यवन के गीत गाते हैं

हम  तो  हर पडोसी  की  नवाजी रोज  करते हैं
सियासत में पले पागल मेरे घर मे ही मरते हैं
पाकिस्तान से कह दो, हिजबुल कितने पालोगे
कबतक मौत के मुॅह सेे वतन अपना सॅभालोगे

यहाॅं  आदर्श    गाॅंधी   के   गाॅंधीवाद   गाता  है
बापू   की   हकीकत  को  मेरा  नेता  बताता है
यहाॅं   उपवास  होता  है तो  भ्रष्टाचार  चलते हैं,
खादी के  लिबाशों  में  ही नक्सलवाद  पलते हैं

अमरीका की कठपुतली बन के कब तक नाचोगे
महाभारत की औलादो गाॅधी को कितना बाॅचोगे
अहिंसा छोड़ कर,ताण्डव करो कैलाश बन जाओ
गाॅंधी  का   करो आदर, पर  सूभाष   को  गाओ

राखों   में   दबे  अंगार  को  फिर  से  सुलगाओ
पढो  चाणक्य नीति की व्यवस्था को पुनः लाओ
बने फिर से वही  भारत, मिटादो हर निशानी को
अब ऐसी ‘आग’ बरसादो,तरस जायें ये पानी को।।
              राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
                       9897399815
       rajendrakikalam.blogspot.com

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