Saturday, June 25, 2016

चीन की दुरबीन
बस जूते खाकर हंसते रहना अपनी तो औकात यही हेेै
स्वाभिमान के हिन्दुस्तानी में भी तो वो बात नही है
आजादी से लेकर अब तक हम चीन को झेल रहे हैं
नेताओ की हिम्मत देखो अपमानो में खेल रहे हेैं
ऋण खाकर घी पीने वाली चार्वाक की बात सही है
बस जूते खाकर हंसते रहना अपनी तो औकात यही हेेै

खाता भी है, गुर्राता है, छूरा पीठ पर घोंप रहा है
सढा हुआ सामान चीन अब, भारत पर ही थोंप रहा है
भारत के भगवान चीन की धरती से बन कर आते हेैं
भगवानो के आडम्बर से हम केवल रोटी खाते हेैं
स्वाभिमान को बेच चुके हैं, हममे अब वो घात नही है
बस जूते खाकर हंसते रहना अपनी तो औकात यही हेेै

कम्प्यूटर, टी. वी. मोबाइल, साडी, कच्छे और बनियाने
चूडी, कंगन, मांग सिंदूरी, चस्मे पहने अन्धे, काने
जूते चप्पल, पेन्ट, कोट और टाई, साडी सभी चीन का
चालू मण्डी भीड लगी है, देख तमाशा तमाशबीन का
कम लागत में माल कमाना अपनी तो बस जात वही है
बस जूते खाकर हसते रहना अपनी तो औकात यही हेेै

उद्योग जगत में 80 प्रतिशत,चीन देश, में घुसा पडा है
भारत वाशी आज देश मे मंहगायी से चुसा पडा है
इसीलिये तो सस्तायी को देख रहे हैं मजबूरी है
हिन्दू,मुस्लिम, सिक्ख, इसाई, कौमो में दिल की दूरी है
अगर एकता हो जाये तो हम इतने अनाथ नही है
बस जूते खाकर हंसते रहना अपनी तो औकात यही हेेै

मोदी जी ने भ्रमण किया पर दुनिया से कुछ सीखा होता
चाण्क्यनीति को पढ लेते तो,अनुभव भी कुछ तीखा होता
आदिकाल से दया प्रेम के कारण ही तो लुटे पडे हैं
वशुधैव कुटुम्बकम् की परिभांषा के कारण हम टुटे पडे हैं
वो सतयुग था,ये कलियुग है, दुनिया में जज्बात नही है
बस जूते खाकर हंसते रहना अपनी तो औकात यही हेेै

अगल बगल के सभी पडोसी चीनी चटनी चाट रहे हैं
जिन पर भी हम दया दिखाएं, वही हमी को काट रहे हैं
हिम्मत हो तो व्यवसायों की दूनियादारी बन्द करा दो
कूटनीति से प्रेम करो,चाणक्य - नीति से द्वन्द करा दो
कवि आग ने समय-समय पर सच्चायी की बात कही है
बस जूते खाकर हंसते रहना अपनी तो औकात यही हेेै।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा;आग
मो098973998
rajendrakikalam.blogspot.com

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