Sunday, June 19, 2016


अहिसुष्ण मीडिया
चमचा बनने के कारण ही तो हम सब विज्ञापन पाते हैं
समाचार के हर पन्ने पर ,भजन सियासत के गाते हैं
केन्द्र,प्रान्त औरजिला,गांव की,सत्ता की खबरे छपती हैं
बे-मतलब की उल्टी-सीधी, बात सियासत की खपती है

हर चैनल पर सारी खबरे पी.एम. की चलवानी होगी
जिसकी सत्ता खबर उसी की बार-बार दोहरानी होगी
जंहा भी पी.एम.भ्रमण करेगा, वंही कैमरा रमण करेगा
पी.एम की तारीफों में भी नियम नही अतिकमण करेगा

पी.एम,,सी.एम प्रथम पृष्ठ में दिखलाना भी है मजबूरी
सत्ता दल के मंत्री, सन्त्री का गाना भी बहुत जरूरी
अगर विपक्ष की बदनामी भी करनी हो तो दिखलाते हैं
चरित्र हनन की सारी खबरे, चैनल में चमचे गाते है

कुछ सम्पादक लगे हुये हैं दरिया दिली दलाली में
दुनिया चाहे कुछ भी बोले क्या रखा है गाली में
ये चौथा स्तम्भ मीडिया सत्ता की मजबूरी है
वाणी - भूषण, बुद्वि - बल्लभ बिकना बहुत जरुरी है

प्रजातन्त्र के अब चुनाव क्या चैनल ही करवायेगे
सत्ता दल की स्वामि - भक्ति को चैनल कब तक गायेगे
बे - रोजगारी, मंहगायी, भुखमरी गरीबी बात नही है
सरकारों के प्रतिद्वन्द की ,चैनल की औकात नही हेै

अब अहिसुष्णता फैल रही है हर चैनल के चौबारे से
खूनी, कतली पनप रहे है चैनल ही के अखबारो से
प्रिन्ट मिडिया आज देश में केवल रद्दी बेच रहा है
उल्टी - सीधी खबरों से बस,धन-दौलत ही खैंच रहा है

क्या भारत में स्वच्छ मीडिया, शुद्व रूप से आयेगा
निष्पक्ष खबर की घटना को क्या चैनल भी दिखलायेगा
र्निभीक निरन्तर लिखने वाले, शुद्व सम्पादक आयेगे
कवि आग तो उस चैनल पर अपनी कविता गायेगे।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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