Thursday, June 16, 2016

गौ-रक्षा आयोग
सुना है मैंने मेरे नाम से मंत्रालय तुम खोल रहे हो
मैं भारत में भूखी - प्यासी, तुम मेरी जय बोल रहे हो
मेरे दूध से हिन्दू ,मुस्लिम, सिक्ख ,इसाई सब पलते हैं
धर्म के ठेकेदारों के घर मेरे ही कारण चलते है

मन्त्री,संत्री,सचिव बनेगे,कितनो के अब भाग्य खुलेंगे
लावारिस गऊ मां के कारण राजनीति के पाप धुलेंगे
मेेरे बच्चे धर्म - धारणा से सडकों पर अब डोलेगे
आश्रम,मठ,मन्दिर,व्यवसायी,धन्धा नया-नया खोलेंगे

मेरी गो-चर की भूमि को गऊ-भक्त सब चाट चुके हैं
गज,फुट,एकड,बीगाह बना कर सारे सेवक बांट चुके हेैं
मेरे नाम की उस धरती पर अय्यासी के धाम खडे हैं
बिना गाय के गऊ सेवक के विज्ञापन हैं ,नाम बडे हैं

हमसे अच्छी इज्जत का सुख सूंवर, कुत्ते उठा रहे हैं
जर्मन, डाबर, डेसमण्ड नशलों के कुत्ते जुटा रहे हेैं
कुत्तो की कीमत को सुन कर, गौ-वंश भी शर्माता हेै
हम घास को तरस रही है, बटर-टोस्ट कुत्ता खाता है

तीर्थ-क्षेत्र में गौ-रक्षा के जगह-जगह अम्बार लगे हैं
बडे-बडे दानी, अभिमानी ,सेवक सब दिन-रात जगे हैं
साण्ड सरीखे मोटे - मोटे गऊ -भक्तो को छांट रहे हैं
बै-तरणी,कुल-करणी मा को सारे मिलकर काट रहे है

मठ,मन्दिर में गऊ सेवा की भक्ति ,तख्ती लटक रही है
आश्रम के बाहर सडकों पर, सुरभि भूखी भटक रही है
तैंतिस कोटि देव धरती हूँ, काम-धेनू की मैं नाती हूँ
कूडा,करकट,पन्नी खाकर अल्प मृत्यु से मर जाती हूँ

मेरे नाम से संरक्षण का आडम्बर कब तक गाओगे
मेरे नाम से दान-दक्षिणा,चन्दा तुम कितना खाओगे
अब तो मैं भी गऊ-सेवा की अभिव्यक्ति पर शर्माती हूँ
कवि आग की कविता सुन कर दर्द हृदय का ही गाती हूँ।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
मो0 9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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