साधू और शैतान
इस देश की राजनीति में साधू भी बिक जाता है
धर्म सनसतन, सम्प्रदाय और मजहब को दर्शाता है
स.पा., बा.स.पा., बी.जे.पी. और कांग्रेस का बाबा हो
जो वर्ग धर्म को छोड रहा हो चौराहे का ढाबा हो
कालनीमि का भेष राष्ट्र में अहिसुष्ण लिख जाता है
इस देश की राजनीति में साधू भी बिक जाता है
जो राजनीति के कू-कर्मो से भाग्य देश का लिखता हो
कंचन , काया, माया, छाया में भी साधू बिकता हो
हर चैनल में राजनीति की चर्चाओं में होता हो
जो गेरूआ अपनी गरिमा चौराहो में खोता हो
धीरे-धीरे ऐसा आडम्बर जनता को दिख जाता है
इस देश की राजनीति में साधू भी बिक जाता है
हर चैनल पर विज्ञापन से साधू माल कमाता हो
योग शास्त्र को भी पातञ्जलि का उद्याोग बताता हो
वही गेरूआ अरब - खरब की काया माया ढोता हो
विरक्त मार्ग पर आसक्ति के बीज कशैले बोता हो
उस धन्धे को आने वाला हर बच्चा सिख जाता हेै
इस देश की राजनीति मे साधू भी बिक जाता है
अहिसुष्णता आर्ट लिविंग की परिभांषा से बढती हो
गृहस्थ - धर्म के उपर भी सन्तो की पीढी चढती हो
सन्यास मार्ग की परिभांषा को अपने ढंग से गाती हो
दशनाम की परम्परा भी आपस में लड जाती हो
धर्म-धाम बुनियाद बिना भी धरती में टिक जाता है
इस देश की राजनीति में साधू भी बिक जाता है
जंहा चोर, डाकूओं के धन्धे भी बाबाओ को भाते हों
गुफा छोड कर आज लंगोटे राजनीति में आते हों
राजनीति के दलो में लोटे और लंगोटे दिखते हों
आढ धर्म की लेकर साधू काले धन से बिकते हों
धर्म हमेशा आडम्बर के कारण ही डिग जाता है
इस देश की राजनीति में साधू भी बिक जाता है
अब बच्चे पैदा करने को भी बाबा ही उकसाता हो
जो ब्रह्मचारीणी माई के संग पूरा साथ निभाता हो
भीख मांगकर खाने वाला अय्यासी में जीता हो
रक्ताम्बर चोले का बाबा खून समाज का पीता हो
कवि आग भी ढोंगी बाबा पर कविता लिख जाता है
इस देश की राजनीति में साधू भी बिक जाता है।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815

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