Friday, June 10, 2016

बिकाऊ प्रजातन्त्र
राज्य सभा के इस सर्कस में जोकर मालामाल हो गये
ये मुर्दे भी सत्ता और विरोधी दल की ढाल हो गये
रात-रात में सढे कबर में क्षत-विक्षत शव लाल हो गये
प्रजातन्त्र के मन्दिर में भी दरिया दिली दलाल हो गये
पक्षी और विपक्षी दोनो इन लाशों को पाल रहे हैं
जन-गण-मन आधिनायक मुर्दो में भारत खंगाल रहे हैं
जिनका कोई मुल्य नही है, कई करोड में बिक जाते हैं
प्रजातन्त्र में इन मुर्दो के कफन,दफन में दिख जाते हैं

आदर्श वाद में जीने वाले खुलकर बोली बोल रहे हैं
सभी सियासी प्रजातन्त्र की औकातों को खोल रहे हैं
दबी जुबा से टी.वी. चैनल वजन सभी का तोल रहे हैं
चाल,चरित्र और चेहरों के संस्कार सडक पर डोल रहे हैं

राज्यसभा की औकातें भी आज गरीब की दाल हो गयी
लोक तन्त्र में संविधान की हालत अब कंकाल हो गयी
भारत में तो नगर वधु भी राजनीति वाचाल हो गयी
रात - रात में नंगी - भूखी पीढी मालामाल हो गयी

जिस भारत के प्रजातन्त्र में नेता ही बिक जाते हों
जिस भारत में खादी डाकू मिलकर सेंध लगाते हो
जिस भारत में कई करोड का दांव गधो पर लगता हो
जिस भारत के प्रजातन्त्र में केवल मुर्दा बिकता हो

इस प्रजातन्त्र के कू - कर्मो से भारत मां शर्माती है
राष्ट्र द्रोह का नया नमूना राज्य सभा दिखलाती है
क्यों राज्य सभा की मर्यादाएं अब नाली में बहती है
कवि आग की कलम आंशुओ से ये कविता कहती है।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
मो0 9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com 









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