Saturday, June 11, 2016

सियासत से रियासत
आओ मिलकर आग लगायें संसद के शमशान में
राजनीति से राम जला है राजनीति पहचान में
यति सति सीता माता भी बदनामी को झेल रही
असुर संतति लोकसभा में लोकलाज से खेल रही
सारे डाकू लगे हुये हैं आज सियासी शान में
आओ मिलकर आग लगायें संसद के शमशान में

हनुमान की औलादें भारत में भूखी भटक रही
बजरंगी को बजरंगी, शिव सैना दोनों खटक रही
आज हूकूमत मन्दिर,मस्जिद के झगडो से होती है
भारत की तो आधी जनता मंहगायी से रोती है
नेताओ के छल,बल, कपटी भाषण हैं गुणगान में
आओ मिलकर आग लगायें संसद के शमशान में

हिन्दू,मुस्लिम, सिक्ख, इसाई सभी विरोधी देश में
अगडी,पिछडी सारी कौमे मजहब के परिवेश में
बंटी पडी है डेढ अरब की भीडें सब तालाबों में
राजनीति ही घूम रही है ,सम्प्रदाय के ख्वाबों में
आतंकी बम फेंक रहे हैं, दीवाली, रमजान में
आओ मिलकर आग लगायें संसद के शमशान में

पाकिस्तान को पहले संघी काट रहे थे बातों से
आर.एस.एस अब भाईचारा बाँट रही जज्बातों से
कौरव,पाण्डव एक बाप का पुत्र उन्हे सब मान रहे
ये राजनीति की रणभेरी का सूत्र सियासी जान रहे
बोट बैंक से बाप दिखा है नेता को अनजान में
आओ मिलकर आग लगायें संसद के शमशान में

मंहगायी और बे-रोजगारी नेता जी सब भूल गये
ऐसा स्वाद लगा सत्ता का, अय्यासी में फूल गये
केवल जुमलो के गमलो में भूखे नंगे पाल रहे
हिन्दू, मुस्लिम की लाशों में भाईचारा डाल रहे
देख रहे हो कफन में लिपटे, मुर्दे कबिस्तान में
आओ मिलकर आग लगायें संसद के शमशान में

कोई एेसी जगह बतादो, जंहा से भारत दिखता हो
कोई एेसी जगह बतादो, जंहा राष्ट्र ना बिकता हो
कोई नेता एेसा ढूंढो, जो मुक्त रहा व्यभिचारों से
कोई नेता एेसा ढूंढो, जो अभियुक्त रहा लाचारों
ये अहंकार में डूब रहे हैं अपने ही अरमान में
आओ मिलकर आग लगायें संसद के शमशान में

कैराना का हिन्दु घर को छोड रहा जज्बातों से
पनप रहा है सम्प्रदाय भी राजनीति आघातों से
मौन खडी है आज सियासत सत्ता के गलियारों में
क्यों राम वृक्ष पैदा होता है, मथुरा के बाजारों में
दिल्ली,यू0पी0 लगे पडे हैं बोट-बैंक अभियान में
आओ मिलकर आग लगायें संसद के शमशान में

राजनीति में भारत, पाकिस्तान बराबर चलता है
दोनो मुल्को की सत्ता का प्यार इसी से पलता है
हर चुनाव में भारत पाकिस्तान विरोधी बन जाता है
काश्मीर में पाकिस्तानी, फतवा, झण्डा लहराता हेै
कवि आग अब कितना लिखे राजनीति पहचान में
आओ मिलकर आग लगायें संसद के शमशान में ।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
मो0 9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com 

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