टमाटर की टर-टर
आज टमाटर नेता जी से टर-टर करके बोल रहा है
प्याज मौन बैठा है धीरे - धीरे पर्ते खोल रहा है
सत्ता में आते ही दालें बलात्कार करके बैठी हैं
मंहगाई तो पूरे देश में सत्याग्रह करके ऐंठी हेैं
भारत वाशी मंहगाई की अहिसुष्णता झेल रहा है
कैराना, मथुरा में नेता खुला डांडिया खेल रहा है
खाद्यमन्त्री व्यवसायी की चर्चा में ही लगा हुआ है
आज सियासत मौन खडी है केवल मुर्दा जगा हुआ हेै
हर चैनल पर कैराना हेै मथुरा का झगडा जारी है
चैनल की भी मजबूरी हेै, मजदूरी ही महतारी है
केवल तर्को और कू-तर्को से भारत को पाल रहे हैं
हिन्दू,मुस्लिम, कौम, कबीलों के झगडे खंगाल रहे हैं
सभी विरोधी मुर्दे बनकर मंहगाई पर मौन खडे हैं
हे, जनमत के मुर्दों जागो पूछो इनसे कौन धडे हैं
जमाखोर, उद्योगपति भी चरण सियासी चाट रहे हैं
मध्य-वर्ग की लाशों को तो सभी सियासी काट रहे है
राहुल बाबा की जय बोलो ,कंही प्रियंका चुनकर लाओ
गांधी,नेहरू के अ पशिष्ठों कुछ तो मंहगाई पर गाओ
मंहगायी पर कम्युनिष्ट और छोटे दल भी डरे खडे हैं
ये भारत का प्रजातन्त्र है, यंहा तो मुर्दे मरे पडे हैं
सत्ता वाले कविता पढकर कविता पर ही चढ जाते हैं
फिर भी अच्छे दिन की भांषा बोल रहे हैं अड जाते हैं
गांधीवादी अपने-अपने धवल वस्त्र को चमकाते हैं
इनसे भी तो पूछ के देखो कितने दिन खिचडी खाते हैं
अच्छे दिन आने वाले हैं, मुर्दो अब तो आँखे खोलो
संविधान के पन्ने फाडो भारत माता की जय बोलो
मैं गरीब हूँ,कोई मुर्दा मेरा कफन उठा कर देखो
कवि आग कहता है मंहगाई की लपटे और ना फेको।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
मो0 9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com
आज टमाटर नेता जी से टर-टर करके बोल रहा है
प्याज मौन बैठा है धीरे - धीरे पर्ते खोल रहा है
सत्ता में आते ही दालें बलात्कार करके बैठी हैं
मंहगाई तो पूरे देश में सत्याग्रह करके ऐंठी हेैं
भारत वाशी मंहगाई की अहिसुष्णता झेल रहा है
कैराना, मथुरा में नेता खुला डांडिया खेल रहा है
खाद्यमन्त्री व्यवसायी की चर्चा में ही लगा हुआ है
आज सियासत मौन खडी है केवल मुर्दा जगा हुआ हेै
हर चैनल पर कैराना हेै मथुरा का झगडा जारी है
चैनल की भी मजबूरी हेै, मजदूरी ही महतारी है
केवल तर्को और कू-तर्को से भारत को पाल रहे हैं
हिन्दू,मुस्लिम, कौम, कबीलों के झगडे खंगाल रहे हैं
सभी विरोधी मुर्दे बनकर मंहगाई पर मौन खडे हैं
हे, जनमत के मुर्दों जागो पूछो इनसे कौन धडे हैं
जमाखोर, उद्योगपति भी चरण सियासी चाट रहे हैं
मध्य-वर्ग की लाशों को तो सभी सियासी काट रहे है
राहुल बाबा की जय बोलो ,कंही प्रियंका चुनकर लाओ
गांधी,नेहरू के अ पशिष्ठों कुछ तो मंहगाई पर गाओ
मंहगायी पर कम्युनिष्ट और छोटे दल भी डरे खडे हैं
ये भारत का प्रजातन्त्र है, यंहा तो मुर्दे मरे पडे हैं
सत्ता वाले कविता पढकर कविता पर ही चढ जाते हैं
फिर भी अच्छे दिन की भांषा बोल रहे हैं अड जाते हैं
गांधीवादी अपने-अपने धवल वस्त्र को चमकाते हैं
इनसे भी तो पूछ के देखो कितने दिन खिचडी खाते हैं
अच्छे दिन आने वाले हैं, मुर्दो अब तो आँखे खोलो
संविधान के पन्ने फाडो भारत माता की जय बोलो
मैं गरीब हूँ,कोई मुर्दा मेरा कफन उठा कर देखो
कवि आग कहता है मंहगाई की लपटे और ना फेको।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
मो0 9897399815
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