दोशी कौन?
सात माह का बच्चा पैदा करने वाले
लावारिस जिसको भी चाहे बाप बनाले
उत्तराखण्ड का भ्रूण गर्भ में चिल्लाता है
राजनीति,का भूत शिशू को क्यों खाता है
लावारिस के वारिस देखो , चौराहों पर
अधमरे शिशू को सभी, समेटे हैं बाॅंहो पर
स्वीटजर- लैंड बनाने के सपने देखें है
राजनीति ने ये कैसे पासे फेके हैं
राजनीति में अफरा - तफरी कैसे आयी
काट रहे हैं बकरे देखो खटिक कसाई
केन्द्र - समर्पित होता तो नेता ही मरते
सडक छाप क्यों उत्तराखण्ड मे आज पसरते
फिर कौन खोदता भ्रष्टाचारों की ये खाई
लोक - पाल की क्या जरूरत थी मेरे भाई
राजनीति विस्तार स्वयं का ही करती है
नई पीढी तो बिना मौत के ही मरती है
अब तो मरने वाले भी क्या सोच रहे हैं
अपने कफन से अपने आॅशू पोंछ रहे हैं
चौराहों पर प्रतिमायें भी चिल्लाती हैं
असुरों की ,इस देव भूमि में, क्यों ख्याति है
जो मरे राज्य के खातिर दर-दर भटक रहे हैं
सभी विरोधी सत्ता कैसे सटक रहे हैं
बलात्कार की कीमत नेता बाॅंट रहे हैं
उत्तराखण्ड की इज्जत घर-घर छाॅट रहे हैं
गाॅंव बसाने से पहले भिखमंगे छाये
पिता बडोनी अपने पुत्रो से शर्माये
ना समझी के संघर्षों ने राज बनाया
देव-भूमि को , दिल्ली वालो ने ही खाया
मूॅंछों का अस्तित्व दाॅंव पर लग जाता है
बिना मूॅंछ का आॅंख मूंद कर क्यों खाता है
पढे़- लिखे भी धूल सडक की फाॅंक रहे हैं
सेवा से निवृत्त चाकरी झाॅंक रहे हैं
उत्तराखण्ड में सन्यासी की ,कैसी मस्ती
सभी विरक्ति बसा रहे हैं अपनी बस्ती
राजनीति में आने को तैयार खडे हैं
देव-भूमि में, काले-धन के अलग धडे़ है
नेताओं के फारम हाउस बन जाते हैं
जाॅंच कराओ ,कंहा से ये पैसे आते हैं
सारी माया परिवारों में बंटी पढी है
नई पीढी क्यो चौराहों पर आज खडी है
नेता जी भी वेतन भत्ता मांग रहे हैं
सेवाओं की सारी शर्तों को लांघ रहे हैं
भीख मांग कर जनता से जनता को खाया
उत्तराखण्ड बना कर हमने ये क्या पाया
लोकपाल की बात सदन में करने वालों
मास, मदिरा खाओ, उत्तरा - खण्ड पचालो
क्या इन सबके बच्चे भी भूखे सोते हैं
असुर आज अस्तित्व शिखर का क्यो खोते हैं
उत्तराखण्ड मे भू - माफिया ही भारी हैं
तहसीलों में फर्जी बे - नामा जारी है
बाबाओं की लीजें नेता कटवाता है
भिखमंगा, भिखमंगो का कैसा भ्राता है
यही सार है, नंगा , उत्तरा - खण्ड खडा है
चोर - उचक्का नैतिक - वादी , आज बडा है
कालीदास ने सदा ही शाखाओं को काटा
उत्तराखण्ड को उत्तराखण्ड वालों ने बाॅंटा
गंगा का जल झीलों में क्यों रूका हुआ हेै
क्यों भारत का भाल, शर्म से झुका हुआ है
राजनीति का, क्या इस पर चिन्तन होता है
ये शिखर सदा से मुर्देां को ही क्यों ढोता है
समय आ गया जागो, उत्तराखण्ड बचाओ
पानी और जवानी अब ना और बहाओ
नई पीढी क्यों भटक रही दाने - दाने को
उत्तराखण्ड मोहताज खडा इज्जत पाने को ।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
मो0 9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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