Monday, January 18, 2016

धर्म के कर्म
मुस्लिम देशों में ही मुस्लिम,मिलकर मुस्लिम काट रहे हैं
पीर मुहम्मद की कुरान को, क्यों मुस्लिम ही बाट रहे हैं
मस्जिद में भी बम,विस्फोटो को ही मुस्लिम डाल रहे हैं
एक मजहब में कंही बन्दगी , कंही दरिन्दे पाल रहे हैं

ईशा,मूसा, पीर मुहम्मद में रंजिस की आग लगी है
धर्म, मजहब की थोथी बातों में कैसी जेहाद जगी है
सारे ठेकेदार धर्म के अमन - चैन फरियाद करेंगे
मानवता को मार रहे हैं, फिर अल्लाह को याद करेंगे

यही बीमारी हिन्दू-धर्मो में भी खुल कर पसर रही है
धर्मो की इस परम्परा में कुछ ना कुछ तो कसर रही है
राम कृष्ण,महावीर,बुद्व को पढकर भी हम भटक रहे हैं
सम्प्रदाय क्यों अजगर बनकर,मानवता को घटक रहे हैं

शान्ती-दूत के परिणेता भी रण-भेरी को जगा रहे हैं
बडे राष्ट्र भी विस्फोटों को इसी काम में लगा रहे है
सब देशं में मानवता की मौतों का सामान भरा है
बात अमन की करने वालों का कैसा मरूधान हरा है

मन्दिर,मस्जिद,चर्चों में तो धर्म-गुरू की लाश पडी है
दुनिया को शमशान बनाने में गुरूओं की खास कडी है
अपने-अपने पैगम्बर की बातों में ही फेल हो गये
भीडों में विस्फोट कराना, ये गुरूओं के खेल हो गये

हिन्दू,मुस्लिम,सिक्ख इसाई में केवल मानव मरता है
पढे-लिखे इन्शान को देखो, मरते-मरते क्या करता है
क्या यही धर्म है मानवता को इस धरती से दूर करो
कवि आग की मानो इन धर्मों को चकनाचूर करो।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
मो0 9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com 

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