Sunday, January 3, 2016

मजहबी आतंक
खून से इतिहास लिखने के मजहब ये कौन हैं
धर्म के ये मौलवी क्यों हरकतों पर मौन हैं
हर तरफ दुनियां में खूनी खेल होता जा रहा है
आयतें आतंक की ये अादमी क्यों गा रहा है

ये मजहब आतंक को अपने ही ढंग से पालता है
कौन सा मजहब है जो विस्फोट को खंगालता है
भगवान,ईसा और खुदा को ये दरिन्दे पालते है
अब तो खुदा को भी दरिन्दे मजहबो में ढालते है

असलहों की हर जगह दूकान चलती जा रही है
आदमी की नस्ल धूंवे सेे पिघलती जा रही है
चैनो अमन की बात खबरों में बराबर चलरही है
धर्म में आतंक की औलाद फिर भी पल रही है

मजहबी बुनियाद के पत्थर उखडने चाहिये
ये सम्प्रदायी सामियाने भी सिकुडने चाहिये
आतंक को हथियार धर्मो का बनाना छोड दो
धर्म में बस, प्रेम हो ऐसा नया कुछ मोड दो

नई शदी में धर्म से कुछ तो निकलना चाहिये
बन्दगी में गन्दगी को भी पिघलना चाहिये
हर मजहब में आदमी हो, आदमी इमान हो
जिन्दगी के चार दिन कब्जा नही मेहमान हो

फिर दिखेगी आदमियत आदमी के हाल में
धर्म का हो आदमी बस, आदमी की चाल में
मैं इबादत की इबारत भी लिखूंगा का काल में
बस,आग की लपटे दिखे इस धर्म के कंकाल में।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
मो09897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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