बातों के आघात
ना मोदी कुछ कर पायेगा ,ना नवाज कुछ कर पायेगा
समय स्वंय ही बोल रहा है,समय समय को ही खायेगा
बात बात को बोल रही है, बात बात को खोल रही है
सात दशक से दो मुल्को के बीच बात ही डोल रही है
नेहरू से लेकर मोदी तक केवल बाते ही चलती हैं
शत्रु,मित्र की कूटनीति भी राजनीति से ही पलती है
डर-डर का,मर-मर कर जीने वालो से जनता मरती है
केवल कुर्सी आज हूकूमत के पद में भी मद भरती है
लियाकत हो ,इस्कन्दर हो,याहिया,जुल्फीकार ताज हो
जिया,मुर्सरफ,जफर अली हो, बेनजीर हो या नवाज हो
ये सभी हूकूमत हिन्दुस्तानी सरहद के विपरीत रही हैं
आतंक वाद को पनपाने की पाकिस्तानी रीत रही है
डेढ अरब की भारत माता, बच्चे लावारिस मरते हैं
सात दशक से देश के नेता से पूछो ये क्या करते हैं
लोकसभा में राज्यसभा में केवल कपडे फाड रहे हैं
वैमनस्य की राजनीति में केवल कुर्सी ताड रहे है
आतंकी और नक्सल ,माओ, हम शदियो से पाल रहे हैं
बोट बैंक में हिन्दु ,मुस्लिम,सिक्ख, इसाई ढाल रहे हैं
आर्यखण्ड अब लावारिस है, शरणागत भी खप जाते हैं
छल,कपटो से देश बिका हेै, दुश्मन,सरहद टप जाते हैं
प्रजातन्त्र में राष्ट्र - भक्ति की आसक्ति की शान नही है
अब गांधीवादी खादी कुर्तों में भारत पहचान नही है
अपने अपने घर भरते है दल,दल-दल में सिमट रहा है
नेताओं के कारण भारत, छल, कपटों से निपट रहा है
याद करो शेखर,सूभाष और बिसमिल्लाह के अवशेषों को
याद करो बल्लभ पटेल को, स्वाभिमान इन्दिरा भेषों को
शब्दो का श्रृंगार करोगे ,कब तक दिल को बहलाओगे
कवि आग की कविताओ से राष्ट्र गीत कब तक गाओगे।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
मो09897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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