Wednesday, January 20, 2016

खाक में पाक
अगर सांप को पालोगे तो जहर जहन में भरना होगा
जिस दरिया में विष घोला है उस दरिया में बहना होगा
घर में ही आतंक पला है दहशत की कोई जात नही है
कांटे बोकर कांटे पाओ अल्लाह ने यही बात कही है

दहशतगर्द दरिन्दो को तो तुम शदियो से झेल रहे हो
इन परहीन परिन्दो से तुम सत्ता में भी खेल रहे हो
क्यों कूरान के लब्जो को, इन कब्जो में ढाल रहे हो
सर्प-संपोले काट रहे है, फिर भी उनको पाल रहे हो

घर-घर ताण्डव मचा हुआ है शहर,गांव,बाजारों में
क्या भविष्य तुम देख रह हो, इन खूनी औजारों में
इन मौतों से सबक सीख लो देश बचाना चाहते हो
क्यों कूरान की आयत को तुम अपने ढंग से गाते हो

भारत की हिंसाओ का भी प्रमाण नजर नही आता है
अब जो सबूत हम भेज रहे हैं , उनको तू झुठलाता है
कितना नाटक और चलेगा कब्रिस्तान बनाने को
ये तेरी फौजें क्यों तत्पर है आतंकी पनपाने को

अभी समय है सोचो,समझो मिलकर के उपचार करो
हिन्दू,मुस्लिम एक बनो फिर से आपस में प्यार करो
शमशान शवों के मरघट से घर का श्रृंगार नही होता
इस बुझी आग के शबनम से शोला अंगार नही होता

दहशतगर्द दरिन्दो का मजहब से प्यार नही होता
मुर्दा नमाज के पढने से कुछ जीवन सार नही होता
बस,एक लक्ष्य हो सत्ता का, ढूंढो दरवेष दरिन्दो को
कवि आग का फतवा है पकडो परहीन परिन्दो को।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
मो0 9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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