Friday, January 29, 2016

गैर - सैण
वाह रे उत्तराखण्ड तेरी ये किस्मत न्यारी
पहुंच गये है गैर - सैण में सभी जुॅवारी
राजनीति की चीलें उतरी धरा में आयी
ढूॅढ रहा है पर्वत अपनी पीर परायी

क्या राजधानीयों से ये,पर्वत सुधर जायेगा
अब गैरसैण का मुद्दा,देखो किधर जायेगा
शैशवता के बाद ,उठी कैसी तरूणायी
शोला बन कर चिन्गारी पर्वत में छायी

बी. जे. पी. अब गाली देकर कोस रही है
यू. के. डी. इस मुद्दे से अफसोस रही है
थर्ड - फ्रंट स्टंट किसी के काम ना आये
अपने भी दिखते है हमको आज पराये

पक्षो और विपक्षों का हल्ला जारी है
हर विकास पर राजनीति ही क्यों भारी है
इस जनमत से मुद्दों को कब तक ढोओगे
उत्तराखंड की इज्जत को कितना खोओगे

अब गैरसैण पर्वत प्रदेश का मध्य भाग है
ये ग्लेशियर भी राजनीति में छिपी आग है
मैं तो ज्वालामुखी धधकता देख रहा हूॅं
दावानल की ताप अभी से सेंक रहा हूॅं

नवजात शिशू पर अब कितना बोझा डालोगे
क्या मुंगेरी के सपनो से जन-मत पालोगे
दशकों का ये अश्क हमें क्याें छला रहा हैें
ये कवि आग है बुझी राख को जला रहा हैे।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
मो0 9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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