आरक्षण या हत्या
युगों युगों की इन भूलों से हम हरिजन को बचा ना पाये
वर्ण-व्यवस्था के विकार के इस जहर को पचा ना पाये
ठाकुर,पण्डित,वैष्य,शुद्र से ही तुम खुद को काट रहे हो
हिन्दू-हिन्दू कहने वालों क्यों हिन्दू को बांट रहे हो
भेद-भाव की यही व्यवस्था विद्यालय में दौड रही है
आविष्कारी वर्ण - व्यवस्था में शदियों से होड रही है
आरक्षण के मतभेदो के कारण पीढी क्यों मरती है
टूट रही है तरू से कलियां,राजनीति क्या-क्या करती है
जिनको शदियों से कुचला है,कुछ तो मान बढाना होगा
इस राजनीति से उपर उठकर ये परवान चढाना होगा
सभी सियासी बोट-बैंक से कब तक इन पर राज करेंगे
जनमत संग्रह की भांषा से,क्या ये पिछडे नाज करेंगे
कानूनो के बन जाने से जन उपकार नही होता है
वैश्या के साैन्दर्य - करण से भी श्रृंगार नही होता है
जो समाज में दबा हुआ हेै, उसको आगे लाना होगा
आरक्षण के विषम अस्त्र का सही ढंग अपनाना होगा
आरक्षित सम्पन्न जातियां लाभ अभी भी उठा रही हैं
अपनी ही पीढी को कौमे, चौराहों पर लुटा रही है
आरक्षण का लाभ उठाकर, इस पीरधी से हटना होगा
हर पिछडे की पात्र-कुशलता पर आरक्षण बंटना होगा
प्रतिभाओं को राजनीति की चक्की में कितना पीसोगे
प्रतिमाओं को चमकाने के चक्कर में कितना घीसोगे
आरक्षण की परिभांषा पर फिर से चिन्तन करना होगा
कवि आग वंचित वर्णो में भी आरक्षण भरना होगा।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
मो0 9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

No comments:
Post a Comment