मातृ देवो भवः
भारत के मन्दिर, मस्जिद में नारी का प्रवेश नही है
भारत माता,मातृशक्ति का अब ये भारत देश नही है
मातृशक्ति को अपने मन्दिर, मस्जिद नये बनाने होगे
पुरूषों से हट कर नारी को नये मजहब अपनाने होगें
प्रकोप धर्म पर शनि का मन्दिर,शैनै-शैने दिखा रहा है
नारी का अपमान धर्म की दिशा बदलना सिखा रहा है
सरस्वति, लक्ष्मी, उमा से धर्मो की बुनियाद पडी है
सीता, सावित्री, द्रोपदी क्यो सडकों पर लाचार खडी है
आज पुरूष प्रधान देश में, नारी का अपमान देश में
बलात्कार शमशान देश में, ये कैसी पहचान देश में
अन्धे लूले, लंगडे, बहरे, देश की सत्ता चला रहे है
सीता और सावित्री, चौराहों पर जिन्दा जला रहे हैं
मजबूरी में यति,सती भी विचलित कभी नही होती है
मातृशक्ति है भारत की जो इज्जत कभी नही खोती है
मानवता क्यों काम-वाशना के कारण गिरती जाती है
सत्युग,त्रेता,द्वापर युग की, खेती अय्यासी खाती है
बन्दर के हाथों में चाकू, बलात्कार ही करवाता है
पाश्चात्य की मदर इण्डिया, हिन्दू की भारत माता है
पूरा-तत्व की शिक्षा,दीक्षा पुनः धरा में लानी होगी
कामवाशना की दुनिया में, फिर से आग लगानी होगी
पढे लिखे संभ्रान्त वाशना के कीडे़ क्यों पनपाते हो
मेरे उद्यानों की कलियों को गलियों में क्यों खाते हो
जन्म-दायिनी बालायें भी अभिशापों में क्यों जीती हैं
जिसको हमने शक्ति माना उसकी ये क्या परिणीति है
नर को पैदा करने वाली, नारी अब उपहास नही है
भारत में तो धर्म-कर्म बिन नारी के कुछ खास नही है
अर्धांगिनी माना है जिसको, उसको क्यों तरसाते हो
क्यों सतित्व से मन्दिर, मस्जिद में ये आग लगाते हो
संविधान के अनुच्छेदों में परिवर्तन को लाना होगा
नारी को भी संस्कारों का रहन, सहन अपनाना होगा
संस्कारी परिधान निमन्त्रण,भोग विलासी बनजाता है
कविताओ से कवि ‘आग ’का छंद हमेशा समझाता है!!
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
मो0 9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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