सियासत में सियार
इस राजनीति में डाकू होना बहुत जरूरी
तभी तो होती हेैे चोरों की इच्छा पूरी
लोकतन्त्र बीहड हेै असली शिशू निकेतन
डाका डालो, उपर से मिलता है वेतन
अब भत्ते, खत्ते, पेन्शन का धन्धा जारी है
जो सबसे बडा लफंगा,वो उतना भारी हेै
स.पा., बा.स.पा., कांग्रेस, बी.जे.पी. टोली
अनुभव से लगती है नेताओं की बोली
लोकसभा और राज्यसभा में नंगे नाचो
अपने - अपने आदर्शों के जुमले बांचो
बिना बात के तर्को में गांधी को लाओ
जेपी,लोहिया,नेहरू के भजनो को गाओ
हिन्द,मुस्लिम कौम,कबीले खूब चलाओ
अगडी,पिछडी कौमो के भजनो को गाओ
रटे रटाये प्रवक्ता हर चैनल में डालो
इस राजनीति में प्रजातन्त्र के तोते पालो
फ्री-फण्ड में बिजली,पानी घर-घर बांटो
नंगे - भूखे गाँव, गली, बस्ती में छांटो
आश्वासन की घूंटी सबके गले में डालो
अब डेढ अरब में नगे ढूंढो, उनको पालो
बडे-बडे डाकू ,बाबा की शरण मे जाओ
कालेधन को मठ,मन्दिर में रोज खपाओ
बडे - बडे, उस्ताद गुरू के सब चेले हेैं
ये प्रजातन्त्र दशनाम अखाडे अलबेले हेैं
चोर, लफंगे, डाकू में अब कंहा विरोध हेै
ये तकनीकी लोकतन्त्र का नया शोध हेै
सबसे बडे लफंगे, शिखर को पा जाते हेैं
सबसे बडे लफंगे, शिखर को पा जाते हैं
आओ जनता प्रजातन्त्र में डाकू ढूंढो
जो सबसे बडा लफंगा, उसको नेता मूंडो
हे भारत माता, डाकू ही तेरी आशा हेै
ये कवि आग ने कविता से फेंका पासा है।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
मो09897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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