नौ दिन चले अढायी कोष
राजनीति में हर नेता का भाषण क्यों कर्कस होता हेै
सत्ता पाकर लोकसभा में क्यों केवल सर्कस होता है
मोदी जी तुमने बोला था, पाकस्तिान मिटा डालूंगा
भारत का अस्तित्व विश्व में , मैं ढूंढगा, खंगालूगा
सरहद पर आतंकवाद के झण्डे फिर भी लहराते हेै
फिर भी हम दुश्मन के घर में केक काटने क्यों जाते हेै
दश नरमुण्डो की भांषा को सुषमा माता बोल रही थी
पिछले महीने सबने देखा, पाकिस्तान में डोल रही थी
भारत में क्या सत्ता पाकर सभी नपुंशक बन जाते हेै
वो घर में घुस कर मार रहा है फिर कैसे रिस्ते नाते हैं
विधवाओ के आंशू पोंछो, अगर बची कुछ औकाते हैं
फिर भी हम दुश्मन के घर में केक काटने क्यों जाते हेैं
आतंकवाद को पाकिस्तानी सात दशक से पाल रहे हेैं
काशमीर से भारत की बुनियादों को खंगाल रहे हैं
सात दशक से हम चुप बैठे,केवल मातम मना रहे हैं
मजहब सम्प्रदाय को लेकर क्या जनता को जना रहे है
क्या प्रजातन्त्र में सत्ता पाना, केवल राजनीति बातें हैं
फिर भी हम दुश्मन के घर में केक काटने क्यों जाते हेैं
जब -जब हमने हाथ बढाये,तब-तब ये घटना होती है
राजनीति के षडयन्त्रो से भारत माता क्यों रोती है
इतना सब कुछ हो जाने पर चर्चायें फिर भी जारी हैं
जिनके घर के मर जाते है उनका दुःख कितना भारी हैं
किस मूँह से हम राष्ट्र-गान को सरहद, संसद से गाते हैं
फिर भी हम दुश्मन के घर में केक काटने क्यो जाते हेै
अब बहुत हो गये रिस्ते नाते,आलिंगन के धन्दे छोडो
करो भरोसा अब फौजों पर,घर में घुस कर कन्धे तोडो
चूहे , बिल्ली के खेलों से, क्या भारत बर्बाद करोगे
क्या प्रेम,अहिंसा के अस्त्रो से शमशानो में नाद करोगे
कवि आग को दुःख होता है क्या ये अपनी औकाते हैं
फिर भी हम दुश्मन के घर में केक काटने क्यो जाते हेै।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
मो09897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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