भारत-पाक की वेदना
एक जमीं है जंहा एक है , दोनों का आकाश एक है
टूटे दिल के दो टुकडों में,आव भाव और आश एक है
जतन एक है कथन एक है,राजनीति का पतन एक है
धर्म मजहब की दोनों कौमें,भटक गयी हैं वतन एक है
कोइ आकर मुझे बतादो इस धरती में कहाॅं हद है
छाती से छाती मिलती हैं दीन इमान का कैसा कद है
दरिया दिली,समन्दर जैसा, पथ पर बैठा कैसा मद है
आन,बान और शान एक हैे, फिर परमादी कैसा पद है
सत्ता और सिायासत की समसीर ने हमको काट दिया
राजनीति की जिल्लत ने शदियों से हमको बाॅंट दिया
अमन -चैन के चुल्हो से, चिनगारी को भडकाया है
सत्ता और सियासत ने शदियों से हमको खाया है
गीता और कुरान की भांषा, मानवता को जोड रही है
नासमझी की अभिव्यक्ति है हिन्दू,मुश्लिम मोड रही है
असमंजस में फंसी कौम धर्म ,मजहब को छोड रही है
द्वन्द-गन्द आतंकी भांषा, दोनो के घर तोड़ रही है
क्यों रोज मर रही दोनो कौमे आतंकी विस्फोटों से
प्रजातन्त्र भी खेल रहा है देख सियासी बोटों से
मिलजाती है पनाह यहाॅं पर हिजबुल को ओसामा को
अब दोनों कौमें खप्पर लेकर देख रही ओबामा को
पाल रहे थे ओसामा, इस्लाम मुकम्मल करने को
सब छिपे पडे़ हेैं आतंकी क्यो कुत्तों जैसे मरने को
क्या दिखलाना चाहते हो तुम झूठे अमली जामो से
क्यों र्निदोशों को मार रहे हो अल्ला के पैगामों से
तरस रहीं हैं,दोनों कौमें टूटा दिल फिर से मिल जाये
फटे लिबासों की जन्नत कोई फरिस्ता तो सिल जाये
मजहब की झूठी बुनियादें,मिले प्रेम तो खुद हिल जाये
नवअंकुर सी दोनों कौमों के हृदय के ,गुल खिल जांये
हिन्दू-मुस्लिम एक बने ये मन्दिर,मस्जिद बन जायेगें
अब कौमों को भडकाने वाले नेता आगे ना आंयेगें
अल्लाह,ईश्वर एक तत्व है, ये जेहादी क्यों भडकातें हैं
ये भिखमंगे आज भी इनके नाम क्यों रोटी खाते हैं
सरिता ,सागर ,जंगल ,मंगल, डंडा , झंडा एक बनाओ
आशा, भांषा, भाव, भंगिमा, एक राष्ट्र का गाना गाओ
कौम एक हो,व्योम एक हो जहर जहन का दूर हटाओ
जम्बूद्वीप पुनः विकसित हो भारत माता के बन जाओ।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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