शान्ती का विस्फोट
मैं हूँ हिन्दू, मैं हूँ मुस्लिम मैं हूँ सिक्ख इसाई
भारत माँ को काट रहे हैं मिलकर चारों भाई
कौम, कबीले, जांति, पांति मे बँट जाती है माई
सम्प्रदाय और मजहब मिलकर खोद रहे हैं खाई
मन्दिर,मस्जिद, गुरूद्वारे और चर्च बने हरजाई
मैं हूँ हिन्दू ,मैं हूँ मुस्लिम मैं हूँ सिक्ख इसाई
हत्या, वध, जेहाद, फसादी शब्द निराले ढूँढे
धर्म गुरू ने अपने - अपने ढंग से चेले मूँडे
कच्ची मिट्टी के भांडो में रंग चढा कर छोडा
बेशर्मी से नयी - नयी कोमल कलियों को तोडा
घोट-घोट कर पिला रहे हैं जंगी जटिल दवाई
मैं हूँ हिन्दू, मैं हूँ मुस्लिम मैं हूँ सिक्ख इसाई
चौराहों पर अस्त्र शस्त्र की होती है नीलामी
बोल रहे है शान्ती दूत की भांषा सारे कामी
फैंक रहे है बम के गोले,अमन चैन की बातें
ये कैसा नाटक है जिसमे छिपी युद्व कर घातें
मुल्ला, पण्डित और पादरी क्या बाबा क्या माई
मैं हूँ हिन्दू, मैं हूँ मुस्लिम मैं हूँ सिक्ख इसाई
हमीं पालने वाले हैं अब हमी बने संहारी
दुष्ट कंहा मरते हैं मरती है जनता बेचारी
सर्प विषैले पाल रहे हैं धर्म मजहब ये सारे
आतंकवाद ने सम्प्रदाय में अपने पैर पसारे
धर्मो के विपरीत , विरोधी बाँटे सभी मिठाई
मैं हूँ हिन्दू, मैं हूँ मुस्लिम मैं हूँ सिक्ख इसाई
ईशा, मूसा, अल्लाह, ईश्वर के ये धन्धे छोडो
मानवता की बात करो,बस मानव के मन जोडो
तालीमों की शिक्षा, दीक्षा, गुरूकुल और मदरसे
संस्कारो की बातें मिलती है, बचपन में घर से
धर्म मजहब से राजनीति की मिलक करो विदाई
मैं हूँ हिन्दू, मैं हूँ मुस्लिम मैं हूँ सिक्ख इसाई।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
मो0 9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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